मुंबई. भारत रत्न स्वर-कोकिला लता मंगेशकर का आज जम्नदिन है. लता आज 87 साल की हो गई हैं. लता मंगेशकर के मधुर आवाज के फैन्स न सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दूनिया में मौजूद हैं. इस मौके पर उन्हें दूनियाभर से बधाईयां भी मिलनी शुरू हो गई हैं.  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी लता मंगेशकर के जन्मदिन पर बधाई दी है.
 
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लेकिन खास बात यह है कि आज वो अपना जन्मदिन नहीं मनाने के कुछ खास मूड में नहीं हैं. बता दें कि कुछ दिन पहले ही उन्होंने ट्वीटर पर एक पोस्ट करके अपील की थी कि उनके जन्मदिन के मौके पर तौफे, बुके भेजकर पैसे खर्च करने की बजाय, देश के जवानों के नाम सहायता राशि भेजे, क्योंकि वो ही देश के असली हीरो हैं. 
 
वहीं लता के जीवन संघर्ष की बात करें तो उनका जन्म 28 सितंबर, 1929 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था. पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर रंगमंच के कलाकार और गायक थे. जब वो 13 साल की थी तभी पिता की अचानक मौत हो गई थी. जिसके बाद पूरे घर की जिम्मेदार लता के कंधों पर आ गई,
 
पहली कमाई 25 रुपए थी
इसके बाद वो मंबई आ गई और मराठी और हिंदी फिल्मों में छोटी-छोटी भूमिकाएं निभानी शुरू की. जब उन्होंने पहली बार मंच पर गाया था तब उन्हें 25 रुपए मिले थे, जो उनकी पहली कमाई है. उनकी जिंदगी में एक समय ऐसा भी था जब उन्हें कई म्यूजिक डायरेक्टर ने यह बोलकर रिजेक्ट कर दिया था कि वो कभी गायिका नहीं बन सकती हैं. इसके बाद उन्होंने हिंदी फिल्मों में साल 1947 में फिल्म ‘आपकी सेवा’ के जरिए जोरदार एंट्री की.
 
लता मंगेशकर को उनकी गायिकी के लिए कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं. लताजी को पद्म भूषण (1969) और भारत रत्न (2001) से सम्मानित किया गाया है. इसके अलावा उन्हें ‘राष्ट्रीय पुरस्कार’, ‘दादा साहेब फाल्के पुरस्कार’ और ‘फिल्म फेयर’ जैसे कई अवार्ड्स से भी नवाजा जा चुका है. लता ही एकमात्र ऐसी जीवित शख्सियत हैं, जिनके नाम पर पुरस्कार दिए जाते हैं.
 
प्वॉइजन देकर की गई थी मारने की कोशिश
रिपोर्ट्स के अनुसार लता जब 32 साल की थीं तब उन्हें स्लो प्वॉइजन देकर जान से मारने की कोशिश की गई थी. इसका जिक्र लता की बेहद करीबी पद्मा सचदेव ने अपनी किताब ‘ऐसा कहां से लाऊं’ में भी किया है. लेकिन इस बात की पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है.