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NEET UG 2026 पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, NTA के पुनर्गठन की मांग पर जारी नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में FAIMA और UDF की याचिका पर नोटिस जारी किया. इस मामले की अब अगली सुनवाई 29 मई को होगी.

By: Munna Verma | Published: May 25, 2026 1:01:30 PM IST



NEET UG Paper Leak: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) द्वारा दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया. इस याचिका में NEET UG 2026 के कथित पेपर लीक के मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को भंग करने या उसका पुनर्गठन करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे सुप्रीम कोर्ट के वकील सत्यम सिंह ने बताया कि अब इस मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार यानी 29 मई को होगी.

इस याचिका पर जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की, जिसने निर्देश दिया कि याचिका की प्रतियां सभी प्रतिवादियों को दी जाएं. सुप्रीम कोर्ट ने NTA को इस मामले में अपना जवाबी हलफनामा दायर करने का भी निर्देश दिया. अदालत ने निगरानी समिति के अध्यक्ष को भी निर्देश दिया कि वे उसके निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें. अपनी याचिका में FAIMA और UDF ने NTA को बदलने या उसमें आमूल-चूल सुधार करने और नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट – अंडरग्रेजुएट (NEET UG) आयोजित करने के लिए एक अधिक सुरक्षित और स्वायत्त तंत्र स्थापित करने के निर्देश देने की मांग की है.

अपनी याचिका में FAIMA ने तर्क दिया कि पेपर लीक के व्यापक आरोप और उसके बाद NEET UG 2026 परीक्षा का रद्द होना, देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में से एक की शुचिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में NTA की ओर से “प्रणालीगत विफलता” को दर्शाता है.

याचिकाकर्ता की क्या है मांग

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से कई निर्देश देने की मांग की है, जिनका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में सुधार करना और भविष्य की मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है. याचिका में की गई प्रमुख मांगों में से एक यह निर्देश है कि NTA को बदलकर या उसका मौलिक पुनर्गठन करके, NEET UG परीक्षाओं के आयोजन के लिए एक मजबूत, तकनीकी रूप से उन्नत और स्वायत्त निकाय बनाया जाए.

याचिका में एक उच्च-स्तरीय निगरानी समिति की नियुक्ति की भी मांग की गई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश, एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और एक फोरेंसिक वैज्ञानिक शामिल हों. याचिकाकर्ताओं के अनुसार यह समिति NEET UG 2026 की दोबारा परीक्षा के आयोजन की तब तक निगरानी करे, जब तक कि परीक्षा प्रक्रिया की देखरेख के लिए प्रस्तावित ‘नेशनल एग्जामिनेशन इंटीग्रिटी कमीशन’ (NEIC) औपचारिक रूप से गठित नहीं हो जाता.

FAIMA और UDF ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि वह NTA या किसी भी नई नियुक्त परीक्षा संस्था को, के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दे. इस समिति का गठन NEET 2024 विवाद के बाद परीक्षा एजेंसी के कामकाज में सुधार के लिए सुझाव देने हेतु किया गया था. याचिका में इसके अलावा यह भी मांग की गई है कि NEET UG 2026 परीक्षा को एक न्यायिक रूप से निगरानी वाली समिति की देखरेख में फिर से आयोजित किया जाए, जब तक कि प्रस्तावित NEIC या कोई अंतरिम निगरानी पैनल, संशोधित परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा की पुष्टि और उसे प्रमाणित न कर दे.

याचिका में एक और बड़ी मांग प्रश्न पत्रों की “डिजिटल लॉकिंग” शुरू करना और कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (CBT) मॉडल को अपनाना है. याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि ऐसे उपायों से प्रश्न पत्रों के परिवहन और रखरखाव से जुड़े भौतिक ‘चेन-ऑफ-कस्टडी’ (सुरक्षा-श्रृंखला) के जोखिम समाप्त हो जाएंगे. याचिका में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि वह NEET पेपर लीक जांच पर एक ‘स्टेटस रिपोर्ट’ (स्थिति रिपोर्ट) जमा करे. इस रिपोर्ट में पहचाने गए नेटवर्क, की गई गिरफ्तारियों, जिन व्यक्तियों पर आरोप लगाए गए हैं और मामले में अभियोजन की प्रगति का विवरण शामिल होना चाहिए.

NEET UG 2026 परीक्षा इस महीने की शुरुआत में देश भर के मेडिकल उम्मीदवारों के लिए आयोजित की गई थी. यह विवाद तब सामने आया जब कई केंद्रों से पेपर लीक होने के आरोप लगे, जिसके कारण बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और परीक्षा रद्द करने की मांग उठने लगी. 

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