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Success Story: जेब में थे सिर्फ 140-280 रुपये, न मोबाइल न कोचिंग, फिर भी दुनिया की सबसे कठिन परीक्षा को किया पास

Success Story के रूप में हान यापिंग की कहानी हर उस छात्र के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को छोटा मानने लगता है. उन्होंने साबित कर दिया कि मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच के दम पर दुनिया की सबसे कठिन परीक्षा को भी पास किया जा सकता है.

By: Munna Verma | Published: July 8, 2026 1:54:59 PM IST



Success Story: सफलता केवल संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि मजबूत इरादों, कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास का परिणाम होती है. इस बात को चीन की 18 वर्षीय छात्रा हान यापिंग (Han Yaping) ने अपनी उपलब्धि से साबित कर दिया है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली हान ने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाने वाली Gaokao (नेशनल कॉलेज एंट्रेंस एग्जाम) में 750 में से 699 अंक हासिल कर हर किसी को प्रेरित किया है.

उनकी इस शानदार सफलता के बाद चीन की दो प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी सिंघुआ यूनिवर्सिटी और पेकिंग यूनिवर्सिटी ने उन्हें प्रवेश का प्रस्ताव दिया है. उनकी कहानी आज लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन चुकी है.

आर्थिक तंगी के बीच तय किया सफलता का सफर

हान यापिंग चीन के हेनान प्रांत के एक साधारण ग्रामीण परिवार से हैं. उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है. उनकी मां एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, जिसके कारण वे काम नहीं कर पातीं. परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके पिता पर है, जो खेती और छोटे-मोटे काम करके घर चलाते हैं. घर की सीमित आय के बावजूद हान ने कभी अपनी पढ़ाई से समझौता नहीं किया. उनके परिवार ने हर संभव तरीके से उनका हौसला बढ़ाया.

स्कूल ने भी बढ़ाया मदद का हाथ

हान की लगन और मेहनत को देखते हुए उनके स्कूल ने उनकी पूरी ट्यूशन फीस माफ कर दी. इसके साथ ही उन्हें मुफ्त आवास और हर महीने आर्थिक सहायता भी दी गई, ताकि वे बिना किसी चिंता के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें. उनके पिता हर सप्ताह केवल 140.14 से 280.27 रुपये पॉकेट मनी देते थे. खास बात यह रही कि हान बेहद सादगी से रहती थीं और अक्सर खर्च न होने पर बची हुई राशि भी घर वापस लौटा देती थीं.

बिना कोचिंग और मोबाइल के हासिल की बड़ी सफलता

आज जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए महंगी कोचिंग और डिजिटल संसाधनों को जरूरी माना जाता है, वहीं हान ने बिना किसी निजी कोचिंग और बिना मोबाइल फोन के यह मुकाम हासिल किया. उन्होंने पूरी तैयारी आत्मअनुशासन, नियमित पढ़ाई और स्कूल की शिक्षा के भरोसे की. यही वजह है कि उनकी सफलता लाखों छात्रों के लिए एक मजबूत संदेश बन गई है कि सीमित संसाधन भी बड़े सपनों को रोक नहीं सकते.

छात्रों को दिया प्रेरणादायक संदेश

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार अपनी सफलता के बाद हान ने छात्रों को पढ़ाई का महत्व समझाते हुए कहा कि अगर वर्तमान में मेहनत नहीं की जाएगी, तो भविष्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. उनका मानना है कि शिक्षा ही जीवन बदलने का सबसे मजबूत माध्यम है.

मेडिकल क्षेत्र में बनाना चाहती हैं करियर

अपनी मां की बीमारी को करीब से देखने के बाद हान ने डॉक्टर बनने का सपना देखा है. वह मेडिकल की पढ़ाई कर लोगों की सेवा करना चाहती हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई मेडिकल विशेषज्ञों ने उन्हें ऑनलाइन मार्गदर्शन देने की पेशकश भी की है. हालांकि, उन्होंने आर्थिक सहायता स्वीकार करने से विनम्रतापूर्वक इनकार कर दिया. उनका कहना है कि वे विश्वविद्यालय में पढ़ाई के साथ पार्ट-टाइम काम करके अपने खर्च पूरे करेंगी.

ज्ञान को मानती हैं जिंदगी बदलने की ताकत

हान का विश्वास है कि शिक्षा किसी भी इंसान की जिंदगी बदल सकती है. उनका लक्ष्य केवल अपना भविष्य बनाना नहीं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना और अपने माता-पिता को बेहतर जीवन देना है. उनकी यह सोच बताती है कि असली सफलता केवल अंक हासिल करने में नहीं, बल्कि अपने सपनों के साथ परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने में भी होती है.

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