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Success Story: जहां अधूरी रह गई थी पढ़ाई, वहीं से शुरू किया सफर, 37 साल बाद 59 की उम्र में दी 10वीं की परीक्षा

Success Story: मेघालय के 59 वर्षीय सिल्वेस्टर शडाप 37 साल बाद 10वीं की परीक्षा देने जा रहे हैं. जानिए Second Chance Learning Programme कैसे ड्रॉपआउट छात्रों को शिक्षा से जोड़ रहा है.

By: Munna Verma | Published: October 1, 2026 9:03:06 PM IST



Success Story: कहते हैं कि पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती. मेघालय के 59 वर्षीय सिल्वेस्टर शडाप इस बात की मिसाल बनकर सामने आए हैं. आर्थिक परेशानियों के चलते करीब 37 साल पहले स्कूल छोड़ने वाले शडाप अब दोबारा परीक्षा हॉल में बैठने की तैयारी कर रहे हैं. उनका लक्ष्य है कि वह आखिरकार अपनी 10वीं की पढ़ाई पूरी कर सकें, जिसे उन्होंने 1989 में अधूरा छोड़ दिया था.

री भोई जिले के थाड्रैंग उमंगम गांव के रहने वाले शडाप ने मेघालय के Second Chance Learning Programme के तहत होने वाली SSLC परीक्षा के लिए प्राइवेट कैंडिडेट के रूप में पंजीकरण कराया है. इस परीक्षा में राज्यभर से 9,767 ऐसे लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिन्होंने किसी न किसी वजह से स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी. शडाप इन सभी उम्मीदवारों में सबसे अधिक उम्र के बताए जा रहे हैं.

परिवार की जिम्मेदारी ने छुड़ाई पढ़ाई

शडाप के लिए स्कूल छोड़ने का फैसला उनकी पसंद नहीं, बल्कि परिस्थितियों की मजबूरी थी. आर्थिक कठिनाइयों के कारण उन्हें कम उम्र में पढ़ाई छोड़कर परिवार की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाना पड़ा. कई दशक बीतने के बाद उन्होंने एक बार फिर किताबें उठाने का फैसला किया. उनके लिए यह सिर्फ परीक्षा पास करने की कोशिश नहीं, बल्कि अधूरे रह गए एक पुराने सपने को पूरा करने का अवसर भी है.

37 साल बाद बदला सिलेबस, फिर भी हौसला कायम

लंबे अंतराल के बाद पढ़ाई शुरू करना उनके लिए आसान नहीं रहा. मौजूदा पाठ्यक्रम उनके समय की पढ़ाई से काफी अलग है. नए विषयों और बदले हुए तरीके के साथ तालमेल बैठाना चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन शडाप परीक्षा की तैयारी को लेकर दृढ़ हैं. उनकी कहानी उन युवाओं और वयस्कों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है, जिन्होंने परिस्थितियों के कारण अपनी शिक्षा रोक दी थी.

9,767 लोगों को मिला पढ़ाई का दूसरा मौका

मेघालय सरकार, Meghalaya Board of School Education (MBOSE) और MPOWER की संयुक्त पहल के तहत राज्य के 12 जिलों में यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इसमें उम्र की कोई अधिकतम सीमा नहीं रखी गई है. पूरे राज्य में 171 Learning and Assessment Centres बनाए गए हैं. री भोई में ही 690 उम्मीदवार पंजीकृत हैं.

मुफ्त अध्ययन सामग्री और आगे की राह

सीखने वालों को खासी, गारो, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और स्वास्थ्य जैसे विषयों की मुफ्त सेल्फ-स्टडी सामग्री दी जा रही है. कार्यक्रम का उद्देश्य आर्थिक परेशानी, पारिवारिक जिम्मेदारियों, पलायन, कम उम्र में शादी या भौगोलिक समस्याओं के कारण पढ़ाई छोड़ चुके लोगों को दोबारा शिक्षा से जोड़ना है.

SSLC पास करने के बाद विद्यार्थियों के लिए हायर सेकेंडरी, वोकेशनल एजुकेशन और स्किल ट्रेनिंग के रास्ते भी खुल सकते हैं. इस तरह 59 वर्षीय शडाप की वापसी सिर्फ एक परीक्षा की कहानी नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि सीखने और आगे बढ़ने के लिए देर जैसी कोई चीज नहीं होती.

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