Home > राजस्थान > NASA में स्पेस और रॉकेट साइंस की बारिकियां सीखेगी राजस्थान की बिटिया, देशभर में सिर्फ 4 छात्रों का चयन, आखिर कैसे मिलता है मौका?

NASA में स्पेस और रॉकेट साइंस की बारिकियां सीखेगी राजस्थान की बिटिया, देशभर में सिर्फ 4 छात्रों का चयन, आखिर कैसे मिलता है मौका?

इस ओलंपियाड में देश भर से एक लाख से ज्यादा छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. इस प्रतियोगिता की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें सिर्फ बड़े शहरों के ही नहीं, बल्कि छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों के बच्चों ने भी बाजी मारी.

By: Kajal Jain | Published: August 15, 2026 7:28:59 PM IST



नासा जाकर स्पेस साइंस के रहस्यों को करीब से समझना और वहां पढ़ाई करना भला किसका सपना नहीं होता. नासा का नाम सुनते ही हर छात्र की आंखें चमक उठती हैं, लेकिन यह सुनहरा मौका किस्मत और कड़ी मेहनत से चुनिंदा लोगों को ही मिल पाता है. राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के खंडार कस्बे की बेटी गौरांगी शर्मा ने इस मुकाम को सच कर दिखाया है. उन्होंने ‘मिटश्योर ओलंपियाड मास्टर्स’ (MetSure Olympiad Masters) में शानदार परफॉर्म करते हुए पॉपुलर नासा (NASA) विजिट के लिए अपनी सीट पक्की कर ली है. खास बात यह है कि पूरे राजस्थान से नासा जाने के लिए चुनी जाने वाली वह इकलौती छात्रा हैं. यदि आप भी छात्र है, नासा और स्पेस साइंस के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं तो यहां जानिए कि छात्रों का सिलेक्शन कैसे होता है और क्या एग्जाम में रजिस्टर करनी की प्रोसेस क्या है.

4 का सिलेक्शन, 50,000 का नकद पुरस्कार

जयपुर में आयोजित राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह के दौरान ‘मिटश्योर ओलंपियाड मास्टर्स’ प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा की गई, जिसमें देश भर से छात्र, शिक्षक और स्कूल प्रतिनिधि शामिल हुए थे. साइंस सब्जेक्ट विषय में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए गौरांगी ने लिखित परीक्षा और इंटरव्यू समेत सिलेक्शन प्रोसेस के सभी कठिन चरणों को सफलतापूर्वक पार किया. कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद देश भर से कुल चार छात्रों को नासा विजिट के लिए चुना गया है, जिनमें राजस्थान से सिर्फ गौरांगी शर्मा शामिल हैं. 

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, सवाई माधोपुर के विद्या दायिनी सेकेंडरी स्कूल की छात्रा गौरांगी बचपन से ही वैज्ञानिक बनने का सपना देखती थीं. अपनी सफलता पर गौरांगी नासा जाने का मौका मिलना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है और भविष्य में वे वैज्ञानिक बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं. गौरांगी की इस ऐतिहासिक सफलता से उनके परिवार, स्कूल और पूरे सवाई माधोपुर जिले में जश्न का माहौल है.

गौरांगी के अलावा हरियाणा की आयशा और मध्य प्रदेश के शुभ जैन व जयप्रकाश प्रकाश पांडे ने बाजी मारी है. इस राष्ट्रीय समारोह में देश भर के 60 प्रतिभावान छात्रों को सम्मानित किया गया, जिन्हें 50,000 रुपये तक के नकद पुरस्कार, मेडल और सर्टिफिकेट दिए गए.  चयनित छात्र रॉकेट साइंस, स्पेस रिसर्च, खगोल विज्ञान और विभिन्न वैज्ञानिक प्रोजेक्ट्स से जुड़ी अत्याधुनिक लैब का अध्ययन करेंगे और वैज्ञानिकों से बातचीत करने का मौका पाएंगे. 

ग्रामीण प्रतिभाओं को मिला नेशनल प्लेटफॉर्म

इस ओलंपियाड की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों और गांवों के बच्चों ने भी बाजी मारी. ‘मिटश्योर’ के चेयरमैन मनोज मित्तल ने बताया कि इस ओलंपियाड के लिए देश भर से एक लाख से ज्यादा छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. उनका उद्देश्य सिर्फ परीक्षा कराना नहीं, बल्कि देश के कोने-कोने से छिपी हुई प्रतिभाओं को सही समय पर सही मंच देना है.  मिटश्योर ओलंपियाड मास्टर्स में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया स्कूलों के जरिए पूरी की जाती है. छात्र सीधे व्यक्तिगत रूप से आवेदन नहीं करते, बल्कि इसके लिए स्कूलों को आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से पंजीकरण करना होता है. इसमें स्कूल द्वारा नियुक्त कोऑर्डिनेटर या शॉर्ट ग्रुप एंट्री के जरिए छात्रों के नाम दर्ज किए जाते हैं. यदि आप भी छात्र है, मेधावी छात्र हैं या आपके आसपास कोई नासा जाकर अंतरिक्ष विज्ञान की बाराकियां सीखना चाहता है तो वह भी बताए गए तरीके से आवेदन कर सकते हैं.

  • सबसे पहले ‘मिटश्योर फॉर्म्स एंड डॉक्यूमेंट्स’ (Mittsure Forms and Documents) पोर्टल पर जाकर स्कूल का रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरना होता है, जिसमें संस्थान और कोऑर्डिनेटर से जुड़ी बुनियादी जानकारियां देनी होती हैं.
  • इसके बाद मिटश्योर की टीम स्कूल से संपर्क करती है और डिजिटल या फिजिकल स्टूडेंट फॉर्म, परीक्षा का पूरा सिलेबस और फीस स्ट्रक्चर उपलब्ध कराती है.
  • स्कूल कोऑर्डिनेटर छात्रों की डिटेल्स, उनके चुने हुए सबजेक्ट जैसे- मैथ्स और साइंस की जानकारी और फीस इकट्ठा करके बोर्ड को सौंपते हैं.
  • अधिक जानकारी के लिए Mittsure Olympiad Masters – MOM की ऑफिशियल साइट पर भी विजिट कर सकते हैं.

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