NEET Success Story: रक्षाबंधन पर भाई-बहन एक-दूसरे को तोहफे देते हैं, लेकिन इस बार एक भाई ने अपनी बहन को ऐसा तोहफा दिया, जिसे वह जिंदगीभर याद रखेगी. यह कहानी सिर्फ NEET की सफलता की नहीं, बल्कि भाई-बहन के भरोसे, मेहनत और एक-दूसरे के सपनों को अपना बनाने की है. कोटा की पढ़ाई और सेना के अनुशासन से निकली इस कहानी में छोटे भाई ने अपनी बड़ी बहन का अधूरा सपना पूरा कर दिया.
राजस्थान के एक गांव से ताल्लुक रखने वाले सेना के अधिकारी मेजर राजेश सांगवान के परिवार की यह कहानी बेहद प्रेरणादायक है. बड़ी बेटी अंजा मेडिकल की तैयारी के लिए कोटा आई थीं. परिवार ने भी उनका पूरा साथ दिया. अंजा ने अपने पहले प्रयास में NEET में 640 अंक हासिल किए और मेडिकल कॉलेज में दाखिला पा लिया. हालांकि उनका सपना दिल्ली स्थित AIIMS में पढ़ने का था, लेकिन रैंक के कारण वह सपना पूरा नहीं हो सका. इसके बाद अंजा ने हार नहीं मानी. उन्होंने अपने अधूरे लक्ष्य को छोटे भाई गौरव के सपने में बदल दिया.
फोन पर होती थी रोज की पढ़ाई
गौरव की तैयारी में अंजा की भूमिका किसी शिक्षक से कम नहीं रही. दूरी के बावजूद दोनों के बीच पढ़ाई को लेकर लगातार बातचीत होती थी. अंजा रोज गौरव से पूछती थीं कि उसने क्या पढ़ा, कितना रिवाइज किया और किस विषय में परेशानी आ रही है. उन्होंने गौरव के लिए पढ़ाई का टाइम-टेबल तैयार किया और उसे नियमित रूप से फॉलो करने के लिए प्रेरित किया. अंजा का मानना था कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि कंसिस्टेंसी, अनुशासन और सही रणनीति भी जरूरी है.
भाई ने हासिल की NEET में AIR 9
गौरव ने बहन की उम्मीदों को अपनी ताकत बनाया. कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने NEET में ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल की और AIIMS Delhi में दाखिला पाने का सपना पूरा कर लिया. गौरव के लिए यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी. उन्होंने अपनी सफलता को अपनी बहन के अधूरे सपने की पूर्ति माना. रक्षाबंधन के मौके पर AIIMS में प्रवेश उनके लिए बहन को दिया गया सबसे बड़ा तोहफा बन गया.
बचपन से था पढ़ाई का माहौल
दोनों भाई-बहन बचपन से ही एक-दूसरे के करीब रहे हैं. अंजा पढ़ाई में हमेशा आगे रही हैं और उनकी मेहनत देखकर गौरव को भी प्रेरणा मिली. गौरव ने कक्षा 10वीं में करीब 92 प्रतिशत और कक्षा 12वीं में 90 प्रतिशत अंक हासिल किए. पिता की पोस्टिंग अलग-अलग जगहों पर होने के बावजूद परिवार ने बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी. पिता का कहना है कि अंजा ने गौरव को जिस तरह लगातार मोटिवेट और गाइड किया, उससे परिवार को काफी मदद मिली.
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बहन के लिए सबसे गर्व का पल
आज अंजा मेडिकल की पढ़ाई के अंतिम चरण में हैं, जबकि गौरव AIIMS Delhi में अपनी मेडिकल यात्रा शुरू करने जा रहे हैं. आगे दोनों का लक्ष्य मेडिकल क्षेत्र में बेहतर मुकाम हासिल करना है. यह कहानी बताती है कि कभी-कभी अपना अधूरा सपना किसी अपने को सौंप देना हार नहीं, बल्कि एक सपने को दो जिंदगियों की मेहनत से पूरा करना होता है. गौरव की AIR 9 ने अंजा के उस सपने को सच कर दिया, जिसे उन्होंने कभी कोटा की गलियों में देखा था.