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PhD Admission: DU का नया नियम छात्रों के लिए गेमचेंजर! अब बिना मास्टर्स भी कर सकेंगे PhD, ये होगी शर्तें

DU FYUG to PhD Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी ने FYUG छात्रों के लिए बड़ी घोषणा की है. अब 4 वर्षीय अंडरग्रेजुएट डिग्री पूरी करने वाले योग्य छात्र सीधे PhD में प्रवेश ले सकेंगे.

By: Munna Verma | Published: July 31, 2026 12:37:42 PM IST



DU FYUG to PhD Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा फैसला लेते हुए चार वर्षीय अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUG) पूरा करने वाले छात्रों के लिए सीधे PhD में प्रवेश का रास्ता खोल दिया है. यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल (Executive Council) ने UGCF 2022 के तहत इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इस फैसले के बाद योग्य छात्र अब मास्टर्स डिग्री किए बिना भी सीधे डॉक्टरेट की पढ़ाई के लिए आवेदन कर सकेंगे, हालांकि इसके लिए कुछ अहम शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होगा.

नई व्यवस्था का उद्देश्य उन छात्रों को शोध के क्षेत्र में जल्दी अवसर देना है, जिन्होंने चार वर्षीय अंडरग्रेजुएट कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है. इससे प्रतिभाशाली छात्र बिना अतिरिक्त समय गंवाए रिसर्च करियर की ओर आगे बढ़ सकेंगे. हालांकि, यह सुविधा सभी छात्रों के लिए नहीं होगी। केवल निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले उम्मीदवार ही सीधे PhD प्रवेश के पात्र होंगे.

सीधे PhD में प्रवेश के लिए क्या हैं पात्रता शर्तें?

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने इस नई व्यवस्था के लिए कुछ स्पष्ट मानदंड तय किए हैं.

उम्मीदवार ने चार वर्षीय FYUG प्रोग्राम सफलतापूर्वक पूरा किया हो.
कुल CGPA 7.5 या उससे अधिक होना अनिवार्य है.
छात्र का अंडरग्रेजुएट रिसर्च प्रोजेक्ट या डिसर्टेशन Scopus-Indexed Journal में प्रकाशित होना चाहिए.
PhD के दौरान छात्र उसी फैकल्टी सदस्य के मार्गदर्शन में रिसर्च करेगा, जिसने उसके UG डिसर्टेशन का निर्देशन किया था.

इन शर्तों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल शोध क्षमता रखने वाले छात्र ही इस विशेष प्रवेश प्रक्रिया का लाभ उठा सकें.

नई व्यवस्था पर उठे सवाल

यूनिवर्सिटी के कुछ सदस्यों ने इस फैसले पर सवाल भी उठाए हैं. उनका कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि छात्र उसी कॉलेज में PhD करेंगे या संबंधित विभाग में. इसके अलावा, इस मार्ग से PhD में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए UGC-NET परीक्षा देने में भी व्यावहारिक कठिनाई हो सकती है, क्योंकि NET के लिए सामान्यतः पोस्टग्रेजुएट डिग्री आवश्यक होती है.

कुछ सदस्यों ने यह भी चिंता जताई कि बिना प्रवेश परीक्षा या इंटरव्यू के सीधे PhD में प्रवेश देने से शोध की गुणवत्ता और शैक्षणिक मानकों पर असर पड़ सकता है.

DU ने लिए कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले

एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने इस बैठक में केवल PhD प्रवेश से जुड़े बदलाव ही नहीं किए, बल्कि कई अन्य अहम प्रस्तावों को भी मंजूरी दी.

विदेशी विश्वविद्यालयों के सहयोग से Semester Away Programme शुरू किया जाएगा.
स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) में MA हिंदी, MA इतिहास, MA राजनीति विज्ञान, MA संस्कृत और MCom के एक वर्षीय पोस्टग्रेजुएट कार्यक्रम शुरू होंगे.
नियमित प्रक्रिया से नियुक्त एड-हॉक शिक्षकों को पे प्रोटेक्शन का लाभ दिया जाएगा.
DU कर्मचारियों और संविदा कर्मचारियों के आश्रितों के लिए ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम लागू करने को भी मंजूरी मिली है.
विश्वविद्यालय के वार्षिक वित्तीय खातों और अन्य प्रशासनिक प्रस्तावों को भी स्वीकृति प्रदान की गई.

छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

नई नीति उन छात्रों के लिए बड़ी राहत है जो कम समय में रिसर्च करियर बनाना चाहते हैं. यदि कोई छात्र FYUG के दौरान उत्कृष्ट अकादमिक प्रदर्शन करता है और शोध कार्य प्रकाशित कर पाता है, तो उसे अब मास्टर्स डिग्री का इंतजार नहीं करना पड़ेगा.

DU FYUG to PhD Admission 2026 का यह फैसला भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है. यह नीति प्रतिभाशाली छात्रों को जल्दी शोध के अवसर देने की दिशा में बड़ा कदम है. हालांकि, इसके सफल क्रियान्वयन के लिए प्रवेश प्रक्रिया, रिसर्च गुणवत्ता और अन्य नियमों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने की आवश्यकता होगी. इससे छात्रों को पारदर्शी और बेहतर शोध वातावरण मिल सकेगा.

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