NEET Success Story: राजस्थान के बूंदी जिले के कापरेन कस्बे के रहने वाले सूरज सैनी की कहानी उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं. परिवार की आर्थिक मदद के लिए छुट्टियों में गांव-गांव जाकर घरों की पुताई करने वाले सूरज ने NEET 2026 में 583 अंक हासिल किए हैं. अब उनका सपना सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS की पढ़ाई करना है.
सूरज बताते हैं कि 12वीं कक्षा से पहले उन्हें NEET परीक्षा के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. उनकी आंटी ने पहली बार उन्हें इस परीक्षा के बारे में बताया. इससे पहले उनका पूरा ध्यान केवल बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने पर था. हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूल से पढ़ाई करने वाले सूरज ने 10वीं में 87 प्रतिशत और 12वीं में 85 प्रतिशत अंक हासिल किए. बोर्ड परीक्षा के बाद ही उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया.
पहली कोशिश से मिली सीख
सूरज ने पहली बार बेहद कम तैयारी के साथ NEET परीक्षा दी. परीक्षा के बाद उन्हें लगा कि पेपर कठिन नहीं था, लेकिन बाद में समझ आया कि उनकी तैयारी पर्याप्त नहीं थी. उन्होंने हार नहीं मानी और घर से ही पढ़ाई शुरू की. बाद में उन्हें कोटा में मुफ्त कोचिंग और रहने की सुविधा मिली, जहां शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उनकी तैयारी को नई दिशा दी.
पेंटिंग का काम कर जुटाते थे पढ़ाई का खर्च
कोटा जाने से पहले सूरज अपनी छुट्टियों में आसपास के गांवों में घरों की पुताई का काम करते थे. उन्होंने यह हुनर किसी प्रशिक्षण से नहीं, बल्कि लोगों को काम करते देखकर सीखा. परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। उनकी मां खेतों में मजदूरी करती थीं और छोटी बहन को आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी. अब सूरज चाहते हैं कि उनकी बहन दोबारा पढ़ाई शुरू करे और अपने सपनों को पूरा करे.
कोचिंग से ज्यादा जरूरी सही मार्गदर्शन
सूरज का मानना है कि सफलता केवल कोचिंग पर निर्भर नहीं करती. उनके अनुसार सही दिशा, अनुशासन और नियमित अभ्यास सबसे ज्यादा मायने रखते हैं. वे कहते हैं कि शिक्षक यह समझने में मदद करते हैं कि क्या पढ़ना है, कितना पढ़ना है और किस तरह तैयारी करनी है. यही मार्गदर्शन उनकी सफलता का अहम हिस्सा बना.
जूनियर छात्रों को दी खास सलाह
सूरज की सलाह है कि जो छात्र डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं, उन्हें 11वीं कक्षा से ही NEET की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. उनका कहना है कि शुरुआत से नियमित तैयारी करने पर अंतिम समय में अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता. वह NCERT पुस्तकों को तैयारी की सबसे मजबूत नींव मानते हैं। उनके अनुसार बायोलॉजी की गहरी समझ, फिजिक्स और केमिस्ट्री के बेसिक्स तथा रोजाना मॉक टेस्ट और प्रश्नों का अभ्यास सफलता की कुंजी है.
संघर्ष से मिली सफलता
सूरज सैनी की कहानी यह साबित करती है कि बड़े सपने पूरे करने के लिए महंगे संसाधनों से ज्यादा जरूरी मेहनत, निरंतर अभ्यास और सही मार्गदर्शन है. आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और अब सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेकर डॉक्टर बनने की दिशा में पहला बड़ा कदम रखने जा रहे हैं. उनकी यह यात्रा हर उस छात्र के लिए प्रेरणा है, जो सीमित परिस्थितियों में भी अपने भविष्य को बेहतर बनाने का सपना देखता है.
ये भी पढ़ें…
Exam Paper Leak: पेपर लीक पर दुनिया का शिकंजा, भारत से चीन तक कैसे टूट रही है नकल माफिया की कमर
PNB Vacancy: पंजाब नेशनल बैंक में इन पदों पर निकली बंपर वैकेंसी, ग्रेजुएट करें आवेदन, 85920 है मंथली सैलरी