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NEET Success Story: स्टोर रूम में 13 घंटे पढ़ाई, गरीबी नहीं रोक सकी सपना, स्कूल कुक की बेटी ने NEET में रचा इतिहास

NEET Success Story: हरियाणा की दिव्या कारकी ने सीमित संसाधनों और बिना महंगी कोचिंग के NEET 2026 में 574 अंक हासिल किए. उनकी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प ने डॉक्टर बनने के सपने को नई उड़ान दी.

By: Munna Verma | Published: July 24, 2026 4:21:41 PM IST



NEET Success Story: सफलता केवल बड़े संसाधनों या महंगी कोचिंग से नहीं मिलती, बल्कि मेहनत, अनुशासन और मजबूत इरादों से भी हासिल की जा सकती है. हरियाणा के जींद जिले के अहीरका गांव की दिव्या कारकी ने यह बात सच साबित कर दिखाई है. आर्थिक चुनौतियों और सीमित सुविधाओं के बावजूद उन्होंने NEET 2026 में 574 अंक हासिल किए और ऑल इंडिया 20,903वीं रैंक प्राप्त की.

दिव्या की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान पर निर्भर हुए बिना अपनी तैयारी पूरी की और डॉक्टर बनने के सपने की ओर मजबूत कदम बढ़ाया.

स्कूल कुक हैं माता-पिता, फिर भी नहीं टूटने दिया बेटी का सपना

दिव्या के पिता दुर्गा बहादुर और मां जानुका पिछले करीब 15 वर्षों से जींद के एक निजी स्कूल में बतौर कुक कार्यरत हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई में कभी समझौता नहीं किया. दिव्या के पिता का मानना है कि शिक्षा ही उनकी बेटी के बेहतर भविष्य का रास्ता है. यही विश्वास पूरे परिवार की सबसे बड़ी ताकत बना.

स्टोर रूम बना पढ़ाई का कमरा

घर छोटा था और पढ़ाई के लिए अलग कमरा उपलब्ध नहीं था. ऐसे में दिव्या ने घर के छोटे से स्टोर रूम को अपना अध्ययन कक्ष बना लिया. वह रोजाना 12 से 13 घंटे तक पढ़ाई करती थीं. घर का शोर, सीमित जगह और दूसरी परेशानियां उनके लक्ष्य के सामने कभी बाधा नहीं बन सकीं.

री-NEET के तनाव में भी बनाए रखा आत्मविश्वास

NEET परीक्षा से जुड़े विवाद और री-एग्जाम की चर्चाओं ने कई छात्रों की तरह दिव्या पर भी मानसिक दबाव बनाया. लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया. दिव्या का कहना है कि वह समय गिनकर नहीं, बल्कि रोज का लक्ष्य पूरा होने तक पढ़ाई करती थीं. परिवार का भरोसा और दोस्तों का सहयोग उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बना.

बिना महंगी कोचिंग के हासिल की सफलता

आज के समय में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए महंगी कोचिंग को जरूरी माना जाता है, लेकिन दिव्या ने सीमित ऑनलाइन संसाधनों और स्कूल के शिक्षकों के मार्गदर्शन से अपनी तैयारी पूरी की. उन्होंने अपने शिक्षकों और सहपाठियों से मिले सहयोग को अपनी सफलता का महत्वपूर्ण कारण बताया. सही दिशा और निरंतर अभ्यास ने उन्हें यह मुकाम दिलाया.

रिजल्ट की रात परिवार के लिए बनी यादगार

NEET का परिणाम आने वाली रात परिवार के लिए बेहद भावुक रही. तकनीकी कारणों से परिणाम देर रात दिखाई दिया, लेकिन जैसे ही सफलता की खबर मिली, पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. माता-पिता के वर्षों के संघर्ष और त्याग का फल देखकर घर का माहौल खुशी से भर गया.

मां का सपना अभी बाकी है

दिव्या की मां का कहना है कि असली खुशी उस दिन होगी जब उनकी बेटी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेकर डॉक्टर बनेगी. उनके लिए यह सफलता सिर्फ शुरुआत है, मंजिल अभी बाकी है.

स्कूल ने भी जताया गर्व

स्कूल प्रशासन ने दिव्या की उपलब्धि को पूरे संस्थान के लिए प्रेरणादायक बताया. शिक्षकों के अनुसार, दिव्या शुरू से ही अनुशासित, मेहनती और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित छात्रा रही हैं. उनकी सफलता यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक सकती.

संघर्ष से सफलता तक का प्रेरक सफर

दिव्या कारकी की कहानी हर उस छात्र के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को छोटा मान लेता है. उन्होंने दिखाया कि मेहनत, परिवार का विश्वास और सही मार्गदर्शन किसी भी मुश्किल को अवसर में बदल सकता है. उनकी सफलता यह संदेश देती है कि बड़े सपने देखने के लिए बड़ी सुविधाओं की नहीं, बल्कि बड़े हौसलों की जरूरत होती है.

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