NEET UG Exam 2026: महाराष्ट्र का लातूर इन दिनों NEET-UG पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई के कारण सुर्खियों में है. हालांकि विवादों के बावजूद इस शहर की पहचान एक मजबूत शैक्षणिक केंद्र के रूप में बनी हुई है. हर साल हजारों छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहां पहुंचते हैं और इस बार भी तस्वीर पूरी तरह नहीं बदली है.
बीड जिले के एक छोटे से गांव के 79 वर्षीय किसान रामकिशन गरद अपने पोते शुभम को NEET की तैयारी के लिए लातूर लेकर आए हैं. खेती में लगातार नुकसान झेल चुके इस परिवार को विश्वास है कि शिक्षा ही बेहतर भविष्य का रास्ता खोल सकती है. शुभम ने हाल ही में दसवीं कक्षा पास की है और अब वह अगले दो वर्षों तक मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करेगा. परिवार का मानना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद अच्छी कोचिंग और मेहनत से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.
पेपर लीक विवाद से छात्रों को झटका, लेकिन तैयारी नहीं रुकी
NEET परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा की घोषणा ने हजारों छात्रों को मानसिक दबाव में डाल दिया था. कई छात्रों को अपनी तैयारी फिर से शुरू करनी पड़ी. हालांकि अधिकांश अभ्यर्थियों ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए दोबारा परीक्षा की तैयारी पर फोकस किया. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार छात्रों का कहना है कि कोचिंग संस्थानों और शिक्षकों के सहयोग ने उन्हें निराशा से बाहर निकलने में मदद की. कई अभ्यर्थियों ने अतिरिक्त समय को अपनी तैयारी मजबूत करने के अवसर के रूप में देखा.
कोचिंग संस्थानों में घटा एडमिशन, भरोसा बहाल करने की चुनौती
पेपर लीक विवाद के बाद लातूर की कोचिंग इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है. स्थानीय शिक्षण संस्थानों के अनुसार जून महीने में नए एडमिशन और एनरोलमेंट में 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है. शिक्षकों और संस्थान संचालकों का मानना है कि शिक्षा क्षेत्र में विश्वास सबसे महत्वपूर्ण पूंजी होती है. ऐसे में छात्रों और अभिभावकों का भरोसा दोबारा जीतने के लिए अच्छे परिणाम और पारदर्शिता जरूरी होगी.
ग्रामीण छात्रों के लिए उम्मीद का केंद्र बना हुआ है लातूर
लातूर की सबसे बड़ी ताकत इसकी किफायती और परिणाम आधारित कोचिंग व्यवस्था मानी जाती है. यहां पढ़ने वाले अधिकांश छात्र ग्रामीण और आर्थिक रूप से साधारण परिवारों से आते हैं. कई परिवारों में ये छात्र पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी होते हैं, जो शिक्षा के जरिए अपने जीवन की दिशा बदलना चाहते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार लातूर से हर साल बड़ी संख्या में छात्र सरकारी मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश प्राप्त करते हैं. यही कारण है कि विवादों के बावजूद शहर की शैक्षणिक प्रतिष्ठा पूरी तरह प्रभावित नहीं हुई है.
सफलता की कहानियां अब भी छात्रों को कर रही हैं प्रेरित
बारामती, धाराशिव, जालना और महाराष्ट्र के अन्य जिलों से आने वाले छात्र आज भी लातूर को अपने सपनों की मंजिल मानते हैं. कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने यहां से पढ़कर सफल हुए वरिष्ठ विद्यार्थियों की कहानियों से प्रेरणा ली है. यही वजह है कि चुनौतियों और विवादों के बावजूद लातूर आज भी उन हजारों छात्रों के लिए उम्मीद का शहर बना हुआ है, जो मेडिकल और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं.