NEET Story: अगर मन में जुनून हो, तो उम्र कभी भी आपके सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती. ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है 57 वर्षीय अशोक बहार (Ashok Bahar) की, जिन्होंने अपने सपनों को साकार करने के लिए इस चुनौतीपूर्ण नीट परीक्षा में हिस्सा लिया. यह परीक्षा एक बार फिर साबित करती है कि सीखने और आगे बढ़ने की कोई उम्र नहीं होती.
लखनऊ के आलमबाग स्थित चंद्रनगर के निवासी अशोक बहार ने लखनऊ मोंटेसरी स्कूल में NEET परीक्षा दी. उनका यह कदम समाज में एक सकारात्मक संदेश देता है कि उम्र केवल एक संख्या है. यदि आपके अंदर जुनून और समर्पण है, तो किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है.
कॉर्पोरेट करियर से मेडिकल फील्ड की ओर
अशोक बहार पहले एक खाद कंपनी में मार्केटिंग हेड के रूप में कार्यरत थे. उन्होंने साल 2000 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली थी. हालांकि उनका करियर पूरी तरह अलग क्षेत्र में था, लेकिन उनका पारिवारिक माहौल हमेशा से शिक्षा और चिकित्सा से जुड़ा रहा. उनकी पत्नी, डॉ. मंजुल बहार, एक डॉक्टर हैं और वर्तमान में अमेरिका में कार्यरत हैं. इसके अलावा, उनके कई रिश्तेदार भी डॉक्टर हैं. यही कारण था कि उनके मन में भी मेडिकल क्षेत्र में योगदान देने की इच्छा जागी.
सेवा की भावना ने जगाई नई राह
अशोक बहार का कहना है कि उन्हें मेडिकल से जुड़ी काफी जानकारी है, लेकिन बिना मेडिकल डिग्री के वे मरीजों को दवाइयां नहीं लिख सकते. यही कमी उन्हें हमेशा महसूस होती रही. लोगों की सेवा करने की इच्छा ने उन्हें NEET जैसी कठिन परीक्षा देने के लिए प्रेरित किया. वे मानते हैं कि अगर आपका लक्ष्य स्पष्ट है और आप मेहनत करने के लिए तैयार हैं, तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती. उनके अनुसार, जीवन में परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, सपनों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए.
NEET में उम्र सीमा नहीं: सभी के लिए अवसर
NEET परीक्षा की खास बात यह है कि इसमें उम्र की कोई सख्त सीमा नहीं है. यही वजह है कि हर उम्र के लोग इसमें भाग लेकर अपने करियर को नई दिशा दे सकते हैं. अशोक बहार की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि सीखने और आगे बढ़ने की कोई उम्र नहीं होती.
प्रेरणा जो हर दिल को छू जाए
अशोक बहार कहते हैं कि परिणाम चाहे कुछ भी हो, प्रयास करना सबसे ज़रूरी है. उनका मानना है कि कोशिश करते रहना ही असली सफलता है. उनकी यह सोच आज के युवाओं और समाज के हर वर्ग के लिए एक मजबूत प्रेरणा है.