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NCERT Emergency Chapter: 50 साल बाद सिलेबस में इमरजेंसी की एंट्री, छात्रों को मिलेगा इतिहास का नया नजरिया

NCERT ने कक्षा 9 की नई सोशल साइंस पुस्तक में पहली बार 1975-77 की इमरजेंसी को शामिल किया है. जानें किताब में क्या पढ़ाया जाएगा और क्यों यह भारतीय लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है.

By: Munna Verma | Published: June 25, 2026 11:04:49 AM IST



NCERT Emergency Chapter: भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए NCERT ने कक्षा 9वीं की सोशल साइंस की नई पुस्तक में पहली बार वर्ष 1975-77 के आपातकाल (इमरजेंसी) को शामिल किया है. नई पाठ्यपुस्तक “Understanding Society: India and Beyond” में इस ऐतिहासिक घटना को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक के रूप में प्रस्तुत किया गया है.

अब तक माध्यमिक स्तर की पुस्तकों में इमरजेंसी पर विस्तृत चर्चा नहीं की जाती थी, लेकिन संशोधित पाठ्यक्रम के तहत छात्रों को इस महत्वपूर्ण दौर से परिचित कराया जाएगा.

लोकतंत्र की परीक्षा के रूप में प्रस्तुत किया गया आपातकाल

नई पुस्तक में इमरजेंसी को केवल एक राजनीतिक घटना के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और उसकी चुनौतियों की कसौटी के रूप में समझाया गया है. अध्याय में बताया गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और शासन के खिलाफ बढ़ते असंतोष ने व्यापक जन आंदोलन को जन्म दिया.

इन परिस्थितियों के बीच जून 1975 में तत्कालीन सरकार ने आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया. इस दौरान कई मौलिक अधिकारों को सीमित कर दिया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और अनेक राजनीतिक नेताओं व सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया.

जयप्रकाश नारायण के आंदोलन को मिली प्रमुख जगह

नई किताब की एक खास विशेषता यह है कि इसमें समाजवादी नेता और स्वतंत्रता सेनानी जयप्रकाश नारायण की भूमिका को प्रमुखता से शामिल किया गया है. पुस्तक में बताया गया है कि उनके नेतृत्व में चले जन आंदोलनों ने विशेष रूप से बिहार और गुजरात में छात्रों और आम नागरिकों को लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संगठित किया.

किताब यह भी स्पष्ट करती है कि वर्ष 1977 में इमरजेंसी समाप्त होने के बाद हुए आम चुनावों में जनता ने अपने मताधिकार का उपयोग करते हुए सत्ता परिवर्तन किया, जिसने भारतीय लोकतंत्र की ताकत को साबित किया.

इमरजेंसी के साथ समकालीन चुनौतियों पर भी चर्चा

NCERT ने इस अध्याय को केवल अतीत की घटना तक सीमित नहीं रखा है. छात्रों को यह समझाने का प्रयास किया गया है कि लोकतंत्र को आज भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. अध्याय में फेक न्यूज़, गलत सूचना, क्षेत्रवाद, जातीय भेदभाव, लैंगिक असमानता, गरीबी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान जैसे विषयों को भी लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियों के रूप में शामिल किया गया है.

“लोकतंत्र और आप” सेक्शन से बढ़ेगी छात्रों की भागीदारी

नई पुस्तक में पहली बार “लोकतंत्र और आप” नामक विशेष खंड जोड़ा गया है. इसका उद्देश्य छात्रों को केवल पाठ्य सामग्री तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक जिम्मेदारियों से जोड़ना है. यह खंड छात्रों को संविधान, अधिकारों और सार्वजनिक जीवन में उनकी भूमिका को बेहतर तरीके से समझने का अवसर देगा.

मीडिया की भूमिका पर भी विशेष फोकस

पुस्तक में मीडिया को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में प्रस्तुत किया गया है. इसमें बताया गया है कि स्वतंत्र मीडिया सरकार को जवाबदेह बनाने, जन समस्याओं को सामने लाने और लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

NCERT की नई सोशल साइंस पुस्तक में इमरजेंसी को शामिल करना केवल पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं, बल्कि छात्रों को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास और उसकी चुनौतियों से परिचित कराने की एक महत्वपूर्ण पहल है. इससे युवा पीढ़ी लोकतंत्र, नागरिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों को अधिक गहराई से समझ सकेगी.

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