JEE Success Story: लद्दाख का द्रास आमतौर पर अपनी कड़ाके की ठंड और कारगिल युद्ध की यादों के लिए जाना जाता है. लेकिन इस बार यह क्षेत्र एक ऐसी उपलब्धि के कारण चर्चा में है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. द्रास के खुंडा गांव की 20 वर्षीय इस्मा ज़बीन (Isma Jabeen) ने JEE Advanced 2026 में ऑल इंडिया रैंक 723 हासिल कर इतिहास रच दिया है. वह लद्दाख की उन चुनिंदा छात्राओं में शामिल हो गई हैं, जिन्होंने इस कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त की है.
इस्मा की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि वह अपने परिवार की पहली सदस्य हैं जिन्होंने JEE Advanced परीक्षा दी और उसे सफलतापूर्वक पास भी किया. उनकी उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि लद्दाख के उन छात्रों के लिए भी प्रेरणा है जिन्हें अब तक इस परीक्षा और इसके अवसरों के बारे में सीमित जानकारी थी. इस्मा का मानना है कि उनकी सफलता के बाद क्षेत्र के अधिक छात्र JEE Advanced के बारे में जानेंगे और इसे अपने करियर विकल्प के रूप में अपनाने का प्रयास करेंगे.
इंजीनियरिंग से बदलना चाहती हैं अपने क्षेत्र का भविष्य
शानदार रैंक हासिल करने के बाद इस्मा के सामने कई विकल्प मौजूद हैं. हालांकि वह कंप्यूटर साइंस और सिविल इंजीनियरिंग के बीच विचार कर रही थीं, लेकिन उनका झुकाव सिविल इंजीनियरिंग की ओर अधिक है. उनका कहना है कि लद्दाख में बुनियादी ढांचे के विकास की बड़ी जरूरत है और वह भविष्य में अपने क्षेत्र के विकास में योगदान देना चाहती हैं. इस्मा विदेश में पढ़ाई या इंटर्नशिप के लिए जाने को तैयार हैं, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य लद्दाख लौटकर यहीं काम करना है.
मेडिकल नहीं, चुना अपना सपना
इस्मा को कई लोगों ने मेडिकल क्षेत्र में जाने की सलाह दी थी. उनकी बायोलॉजी मजबूत थी और लोग मानते थे कि उन्हें डॉक्टर बनना चाहिए. लेकिन उन्होंने अपनी रुचि और लक्ष्य को प्राथमिकता दी. उन्होंने गणित और इंजीनियरिंग के प्रति अपने जुनून को चुना और उसी दिशा में मेहनत जारी रखी. इस फैसले में उनके परिवार ने भी पूरा सहयोग दिया, जिसने उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की ताकत दी.
सीमित संसाधनों के बीच हासिल की बड़ी सफलता
द्रास जैसे दूरदराज क्षेत्र में JEE की तैयारी करना आसान नहीं है. यहां बड़े कोचिंग संस्थान नहीं हैं, इंटरनेट कनेक्टिविटी भी कई बार प्रभावित होती है और प्रतिस्पर्धी माहौल भी सीमित है. फिर भी इस्मा ने इन चुनौतियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. उनका मानना है कि बड़े शहरों की तुलना में द्रास में रहकर उन्हें कम दबाव और अधिक मानसिक शांति मिली, जिससे वे बेहतर तरीके से पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकीं.
युवाओं के लिए प्रेरणा बनीं इस्मा
इस्मा ज़बीन की कहानी यह साबित करती है कि सफलता केवल संसाधनों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और आत्मविश्वास पर आधारित होती है. द्रास की इस बेटी ने दिखा दिया कि देश के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं. उनकी उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है.
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