JEE Advanced Success Story: संसाधनों की कमी या मुश्किल हालात सपनों को रोक नहीं सकते हैं. उनकी मां का संदेश साफ था कि लगातार मेहनत करते रहो, परिणाम खुद सामने आएगा. एक मां का साधारण-सा भरोसा तुम जो भी करोगे, सही होगा, बस पढ़ाई करते रहो, बेटे के लिए सबसे बड़ी ताकत बन गया. यही शब्द उनके लिए उस मुश्किल दौर में उम्मीद की किरण बने, जब वह पढ़ाई और जिंदगी दोनों में संघर्ष कर रहा था. हम जिनकी बात कर रहे हैं, उनका नाम सागर है.
उत्तर प्रदेश के मोदीनगर के रहने वाले 17 वर्षीय सागर का बचपन आसान नहीं था. परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और उनके पिता पेंटिंग का काम करते हैं, जबकि मां दर्जी का काम करती हैं. स्कूल के दौरान उन्हें इंग्लिश मीडियम से हिंदी मीडियम में शिफ्ट होना पड़ा, जिससे पढ़ाई में कई चुनौतियां आईं. कभी-कभी हालात इतने कठिन हो जाते थे कि वह हार मानने के बारे में सोचते थे, लेकिन मां की बातों ने हमेशा उन्हें संभाला.
शिक्षा में बदलाव और नई उम्मीद
सागर ने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की और यूपी बोर्ड की 12वीं परीक्षा में 82 प्रतिशत अंक हासिल किए. छठी कक्षा तक उन्हें अंग्रेजी समझने में कठिनाई होती थी, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने भाषा पर पकड़ बनाई और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते गए. आठवीं कक्षा में मिली National Means-cum-Merit Scholarship (NMMS) ने उनकी पढ़ाई को नई दिशा दी और आर्थिक मदद भी प्रदान की.
JEE की तैयारी और मेहनत का सफर
कक्षा 11 से उन्होंने कोचिंग और सेल्फ-स्टडी के साथ JEE की तैयारी शुरू की. दिन में लगभग 8 घंटे की पढ़ाई के साथ उन्होंने बोर्ड परीक्षा और JEE दोनों को संतुलित किया. उनके लिए गणित सबसे कठिन विषय था, लेकिन उन्होंने लगातार अभ्यास और समय देकर इसे मजबूत बनाया.
असफलताओं से सीखी सबसे बड़ी सीख
मॉक टेस्ट में कम स्कोर और JEE Main के खराब प्रदर्शन ने कई बार उन्हें हतोत्साहित किया. एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने तैयारी छोड़ने के बारे में सोचा. लेकिन हर बार उनकी मां की एक ही बात उन्हें आगे बढ़ाती रही कि तुम जो भी करोगे, सही होगा, बस पढ़ते रहो.
JEE Advanced पास कर बदली किस्मत
सागर ने आखिरकार भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक JEE Advanced पास कर ली. यह उनके लिए केवल एक परीक्षा का परिणाम नहीं बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष और परिवार के भरोसे की जीत थी. अब वह JoSAA काउंसलिंग प्रक्रिया के जरिए IIT में दाखिले की तैयारी कर रहे हैं.