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JEE में नहीं मिली सफलता, BITS पिलानी में 0.5% से चूके, सालों बाद उसी संस्थान से अवॉर्ड लेने लौटे

गौरव खेतरपाल ने तीन बार JEE दिया लेकिन IIT में एडमिशन नहीं मिला. BITS Pilani का कटऑफ भी मामूली अंतर से छूटा. बाद में वहीं से मास्टर्स किया और Startup Excellence Award हासिल किया.

By: Munna Verma | Published: October 2, 2026 12:20:03 PM IST



Success Story: कॉलेज एडमिशन का दौर अक्सर छात्रों के लिए बेहद तनावपूर्ण होता है. एक परीक्षा का स्कोर, कुछ अंकों का अंतर या कटऑफ से मामूली चूक कई बार ऐसा महसूस करा सकती है कि भविष्य की सारी योजनाएं खत्म हो गईं. लेकिन गौरव खेतरपाल की कहानी बताती है कि 18 साल की उम्र में मिली असफलता जीवन की अंतिम मंजिल तय नहीं करती.

खेतरपाल ने अपनी कहानी सोशल मीडिया पर साझा करते हुए बताया कि उन्होंने 1995 से 1997 के बीच JEE की तीन बार परीक्षा दी, लेकिन IIT में दाखिला हासिल नहीं कर सके. इसके बाद उनकी उम्मीदें BITS Pilani से जुड़ी थीं. हालांकि, वहां भी वे कटऑफ से 0.5 प्रतिशत से भी कम अंतर से पीछे रह गए.

IIT और BITS दोनों से चूकने के बाद नहीं मानी हार

IIT और BITS Pilani में प्रवेश न मिलने के बाद खेतरपाल ने एक टियर-3 कॉलेज से अपनी पढ़ाई शुरू की. उस समय यह अनुभव उनके लिए निराशाजनक था, लेकिन उन्होंने इसे अपने करियर की सीमा नहीं बनने दिया. मेहनत जारी रखते हुए उन्होंने एक लैटरल एंट्री परीक्षा में टॉप किया, जिसके जरिए उन्हें टियर-2 संस्थान में जाने का अवसर मिला. इसके बावजूद BITS Pilani में बेहद मामूली अंतर से एडमिशन न मिल पाने की बात उनके मन में लंबे समय तक रही.

उन्होंने बताया कि BITS के प्रति उनके मन में इतना सम्मान था कि वहां प्रवेश न मिलना उन्हें बेहद परेशान करता था. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई.

जिस कॉलेज में एडमिशन नहीं मिला, वहीं लौटे

समय ने खेतरपाल को उसी संस्थान तक वापस पहुंचाया जिसे कभी वह अपनी पहुंच से बाहर मान चुके थे. 2002-03 में उन्होंने BITS Pilani से मास्टर डिग्री पूरी की. यह उनके सफर का एक महत्वपूर्ण मोड़ था. जिस संस्थान का नाम कभी उनके लिए निराशा से जुड़ा था, वही आगे चलकर उनकी उच्च शिक्षा का हिस्सा बन गया.

सालों बाद BITS से मिला Startup Excellence Award

गौरव खेतरपाल की BITS से जुड़ी कहानी का एक और खास अध्याय तब सामने आया, जब उन्हें हाल ही में जयपुर में आयोजित एक एलुमनाई कार्यक्रम में Startup Excellence Award से सम्मानित किया गया. यह पुरस्कार उन्हें और उनकी टीम को Vanshiv Technologies में किए गए कार्य के लिए मिला. इस तरह वर्षों पहले छूटा हुआ BITS का सपना उनके जीवन में एक अलग रूप में वापस आया.

असफलता से आगे बढ़ने की सीख

खेतरपाल की यात्रा छात्रों के लिए एक अहम संदेश देती है. प्रवेश परीक्षा का परिणाम यह जरूर तय कर सकता है कि किसी छात्र का सफर कहां से शुरू होगा, लेकिन जरूरी नहीं कि वही उसके करियर की अंतिम दिशा भी तय करे. किसी प्रतिष्ठित संस्थान में एडमिशन न मिलना निराशाजनक हो सकता है, लेकिन लगातार सीखते रहने, अवसर तलाशने और मेहनत करते रहने से रास्ते बदल सकते हैं.

गौरव खेतरपाल के मामले में भी एक ऐसा ही मोड़ आया कि जिस कॉलेज में वे मामूली अंतर से प्रवेश नहीं पा सके, उसी से उन्होंने वर्षों बाद मास्टर डिग्री हासिल की और आगे चलकर अपने उद्यमिता कार्य के लिए सम्मान भी पाया. यह कहानी खास तौर पर उन छात्रों के लिए मायने रखती है जो किसी परीक्षा या कटऑफ को अपने भविष्य का अंतिम फैसला मान लेते हैं. कभी-कभी मंजिल वही होती है, बस वहां पहुंचने का रास्ता बदल जाता है.

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