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JEE फेल, GRE में कई कोशिशें, फिर भी नहीं टूटा हौसला, 520 रिजेक्शन के बाद Google में मिली नौकरी

Success Story: JEE में दो बार असफल होने के बावजूद रिजुल मलिक ने हार नहीं मानी. IP यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर उन्होंने मेहनत जारी रखी और आखिरकार Google में शानदार नौकरी हासिल कर ली.

By: Munna Verma | Published: May 11, 2026 2:37:49 PM IST



Success Story: कई छात्रों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता ही करियर का अंतिम लक्ष्य मानी जाती है. लेकिन रिज़ुल सिंह मलिक (Rizul Singh Malik) की कहानी इस सोच को पूरी तरह बदल देती है. हरियाणा के रोहतक से ताल्लुक रखने वाले रिजुल आज Google में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन कंसल्टेंट के तौर पर काम कर रहे हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, असफलताओं और लगातार मेहनत से भरा रहा.

रिजुल ने दिल्ली के दिल्ली पब्लिक स्कूल, वसंत कुंज से पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने JEE परीक्षा की तैयारी शुरू की, लेकिन दो बार असफल रहे. एक बार तो ड्रॉप ईयर लेने के बावजूद वह कटऑफ तक पार नहीं कर सके. उन्होंने बताया कि उस समय उन्होंने कोचिंग, ट्यूटर, किताबें और मॉक टेस्ट सब कुछ किया था. परीक्षा में असफल होने के बाद पूरे परिवार में मायूसी छा गई थी. रिजुल कहते हैं कि JEE में फेल होना उनके लिए भावनात्मक रूप से बेहद कठिन था, लेकिन बाद में उन्हें समझ आया कि एक परीक्षा किसी इंसान का पूरा भविष्य तय नहीं करती.

IP यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ नया सफर

JEE में असफलता के बाद रिजुल ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से B.Tech किया. कॉलेज के दौरान उन्होंने सिर्फ सिलेबस तक खुद को सीमित नहीं रखा. वर्ष 2019 में बर्कले समर स्कूल का अनुभव उनके लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जहां उन्होंने पहली बार गंभीरता से डेटा साइंस को समझा. यहीं से उनका सपना अमेरिका जाकर पढ़ाई करने का बना.

चार बार GRE परीक्षा देकर हासिल किया सपना

कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, इरविन में दाखिला पाने के लिए रिजुल ने चार बार GRE परीक्षा दी. लगातार कम स्कोर आने और लोगों की बातें सुनने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. आखिरकार उन्हें UC Irvine में एडमिशन मिल गया. रिजुल कहते हैं कि असली जीत सिर्फ एडमिशन नहीं थी, बल्कि यह थी कि उन्होंने हार नहीं मानी.

अमेरिका में अकेलापन, प्रोबेशन और संघर्ष

अमेरिका पहुंचने के बाद भी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं. नए माहौल, अकेलेपन और पढ़ाई के दबाव के कारण उनका GPA गिर गया और उन्हें अकादमिक प्रोबेशन पर डाल दिया गया. इतना ही नहीं, उन्होंने नस्लवाद का भी सामना किया. हालांकि, रिजुल ने खुद को संभाला। अतिरिक्त क्लासेज, लगातार पढ़ाई और दूसरों से मदद लेकर उन्होंने अपने प्रदर्शन में सुधार किया और आखिरकार 3.3 GPA के साथ मास्टर्स पूरा किया.

520 रिजेक्शन के बाद मिला Google का ऑफर

रिजुल के करियर का सबसे कठिन दौर तब आया जब उन्हें नौकरी के लिए लगातार रिजेक्शन मिलने लगे. उन्होंने 520 से ज्यादा रिजेक्शन झेले, लेकिन प्रयास जारी रखा. आखिरकार वह दिन आया जब Google से ऑफर लेटर मिला. यह पल उनके और उनके परिवार के लिए बेहद भावुक था. रिजुल कहते हैं कि उनकी मंगेतर खुशी और माता-पिता ने हर मुश्किल समय में उनका साथ दिया. रिजुल का मानना है कि जिंदगी में सिर्फ टैलेंट नहीं, बल्कि धैर्य और लगातार प्रयास सबसे ज्यादा मायने रखते हैं.

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