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JEE Success Story: सुबह 5 बजे से शुरू होती थी पढ़ाई, मॉक टेस्ट में कम नंबर से नहीं हारे, ऐसे मिली बड़ी कामयाबी

JEE Advanced Success Story: सही रणनीति और लगातार प्रयास के साथ कोई भी छात्र अपने सपनों को साकार कर सकता है. ऐसी ही कहानी दिल्ली के एक लड़के की है, जिन्होंने जेईई एडवांस्ड में इतिहास रच दिया है.

By: Munna Verma | Published: June 7, 2026 7:04:10 PM IST



JEE Success Story: इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में सफलता हासिल करना हर छात्र का सपना होता है, लेकिन कुछ छात्र अपनी मेहनत और समर्पण से इस सपने को हकीकत में बदल देते हैं. JEE Advanced 2026 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 84 प्राप्त करने वाले अर्णव जैन (Arnav Jain) ऐसे ही छात्रों में शामिल हैं, जिनकी सफलता आज लाखों अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है.

दिल्ली के पुष्प विहार स्थित स्कूल में पढ़ने वाले अर्णव ने अपनी इस उपलब्धि के पीछे लगातार मेहनत, अनुशासित जीवनशैली और परिवार व शिक्षकों के सहयोग को सबसे बड़ा कारण बताया है.

रिजल्ट देखने का वह खास पल

अर्णव के लिए JEE Advanced का परिणाम केवल एक रैंक नहीं था, बल्कि वर्षों की मेहनत का फल था. रिजल्ट देखने के बाद उनके घर में खुशी का माहौल बन गया. उन्होंने बताया कि परिणाम देखकर वे बेहद भावुक हो गए थे क्योंकि यह सिर्फ उनकी नहीं बल्कि पूरे परिवार की सफलता थी. तैयारी के दौरान परिवार ने हर कदम पर उनका साथ दिया और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा.

सफलता के पीछे छिपा अनुशासित स्टडी रूटीन

JEE जैसी कठिन परीक्षा में शानदार रैंक हासिल करने के लिए अर्णव ने एक व्यवस्थित और संतुलित दिनचर्या अपनाई. उनका दिन सुबह 5 बजे शुरू होता था. सुबह के समय वे लगभग तीन घंटे तक पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ाई करते थे। इसके बाद वे कोचिंग क्लास में शामिल होते और दोपहर तक अध्ययन जारी रखते. शाम के समय वे वर्कशीट हल करने, पुराने टॉपिक्स दोहराने और कठिन प्रश्नों का अभ्यास करने पर विशेष ध्यान देते थे. उनकी पढ़ाई का समय रात 10 बजे तक चलता था। यही निरंतरता उनकी तैयारी की सबसे बड़ी ताकत बनी.

किन किताबों और संसाधनों से मिली मदद?

अर्णव ने नियमित कोचिंग सामग्री के साथ-साथ कुछ प्रतिष्ठित संदर्भ पुस्तकों का भी उपयोग किया. फिजिक्स के लिए मानक रेफरेंस बुक्स, इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री के लिए J.D. Lee और मैथ्स के लिए कोचिंग मॉड्यूल और अतिरिक्त प्रैक्टिस मटीरियल का सहारा लिया. उनका मानना है कि सही अध्ययन सामग्री और नियमित अभ्यास से कठिन विषयों की समझ बेहतर होती है.

कम स्कोर और आत्म-संदेह से कैसे निपटे?

JEE की तैयारी के दौरान हर छात्र को उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है. अर्णव भी इससे अछूते नहीं रहे। कई बार मॉक टेस्ट में उम्मीद से कम अंक आने पर उनका आत्मविश्वास प्रभावित हुआ. हालांकि, उन्होंने एक महत्वपूर्ण आदत बनाई, निराशा में ज्यादा समय बर्बाद न करना. वे गलतियों का विश्लेषण करते, उनसे सीखते और फिर नई ऊर्जा के साथ तैयारी में जुट जाते थे.

JEE उम्मीदवारों के लिए अर्णव की सलाह

अर्णव का मानना है कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र निरंतरता है. उनके अनुसार, यदि किसी मॉक टेस्ट में कम अंक आएं तो घबराने के बजाय अपनी कमजोरियों पर काम करना चाहिए. वे छात्रों को अनुशासन बनाए रखने, सकारात्मक सोच रखने और खुद पर विश्वास करने की सलाह देते हैं.

IIT Delhi और भविष्य का सपना

अर्णव का लक्ष्य IIT Delhi से Computer Science Engineering की पढ़ाई करना है. आगे चलकर वे रिसर्च और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में योगदान देना चाहते हैं और अपने ज्ञान का उपयोग समाज और देश के विकास के लिए करना चाहते हैं.

अर्णव जैन की सफलता यह साबित करती है कि बड़े लक्ष्य केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास से हासिल किए जाते हैं. उनकी कहानी उन छात्रों के लिए प्रेरणा है जो JEE Advanced जैसी चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं.

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