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IIT JEE Success Story: 10वीं के बाद जिंदगी ने बदली राह, मां बनीं सहारा, ऐसे पूरा किया IIT दिल्ली का सपना

IIT JEE Success Story: पिता को खोने के बाद पुष्पक ने कोटा जाने के बजाय घर पर तैयारी की. रातों की पढ़ाई में मां का साथ उनके IIT सपने की सबसे बड़ी ताकत बना.

By: Munna Verma | Published: September 30, 2026 3:51:59 PM IST



IIT JEE Success Story: आईआईटी में दाखिले का सपना देखने वाले हजारों छात्र कोचिंग के लिए कोटा जैसे शहरों का रुख करते हैं. लेकिन पुष्पक पुजारी ने अपनी तैयारी के लिए अलग रास्ता चुना. पिता को 10वीं कक्षा में खोने के बाद उन्होंने परिवार से दूर जाकर कोचिंग करने के बजाय घर पर रहकर तैयारी करने का फैसला किया. इस सफर में उनकी मां उनका सबसे मजबूत सहारा बनीं.

रात के 2 या 3 बजे तक पढ़ाई करते समय उनकी मां अक्सर उनके पास मौजूद रहती थीं. कई बार ऐसा भी हुआ जब पढ़ाई में व्यस्त पुष्पक की मां स्टडी टेबल के पास ही सो गईं. उनके लिए यह सिर्फ परीक्षा की तैयारी नहीं थी, बल्कि परिवार के मुश्किल दौर के बीच अपने लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश थी.

पहली कोशिश में AIR 2790, लेकिन सपना अभी बाकी था

JEE की पहली कोशिश में पुष्पक ने ऑल इंडिया रैंक 2790 हासिल की. यह एक उल्लेखनीय प्रदर्शन था, लेकिन उनकी पसंद के इंजीनियरिंग कोर्स और संस्थान में दाखिले के लक्ष्य के लिए उन्हें इससे बेहतर रैंक की जरूरत थी. यहीं से उन्होंने दोबारा प्रयास करने का फैसला किया. यह निर्णय आसान नहीं था, क्योंकि तब तक वह कॉलेज में दाखिला ले चुके थे. उन्हें अपनी नियमित पढ़ाई के साथ JEE की तैयारी भी जारी रखनी थी.

कॉलेज लाइफ के कई मौके किए मिस

दूसरी कोशिश की तैयारी का मतलब था कि पुष्पक को कॉलेज के कई सामान्य अनुभवों से दूरी बनानी पड़ी. दोस्तों के साथ घूमना, कॉलेज फेस्टिवल और गोवा जैसी ट्रिप उनके लिए प्राथमिकता नहीं रह गईं. उन्होंने अपना समय उस लक्ष्य के लिए लगाया जिसे वह पहली कोशिश में हासिल नहीं कर पाए थे. कॉलेज और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने लगातार अपनी रणनीति पर काम किया.

AIR 183 ने बदल दिया पूरा परिणाम

दूसरे प्रयास में उनकी मेहनत का असर परिणाम में साफ दिखाई दिया. पुष्पक ने अपनी रैंक में बड़ा सुधार करते हुए AIR 183 हासिल की. इस प्रदर्शन के बाद उन्हें IIT दिल्ली के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग प्रोग्राम में प्रवेश मिला. लेकिन पुष्पक के लिए इस सफलता की सबसे खास बात सिर्फ रैंक या IIT में दाखिला नहीं है. इस पूरी यात्रा में उनकी मां की भूमिका उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण रही.

सफलता के पीछे छिपी एक भावुक कहानी

IIT दिल्ली पहुंचने के बाद जब पुष्पक अपने सफर को याद करते हैं, तो उनके लिए सबसे यादगार चीज शायद रैंक नहीं, बल्कि वे रातें हैं जब उनकी मां उनके पास बैठकर उन्हें पढ़ते देखती थीं. उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की सफलता के पीछे सिर्फ किताबें, कोचिंग और टेस्ट सीरीज नहीं होतीं. कई बार परिवार का साथ, व्यक्तिगत परिस्थितियां और लक्ष्य के प्रति लगातार बने रहने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

पुष्पक पुजारी का सफर AIR 2790 से AIR 183 तक की रैंक सुधार की कहानी जरूर है, लेकिन इससे आगे यह एक ऐसे छात्र की कहानी है जिसने अपनी परिस्थितियों के बीच रास्ता बनाया और अपनी मां के साथ मिलकर IIT का सपना पूरा किया.

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