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Success Story: IIT Mandi से इंजीनियरिंग, L&T की नौकरी छोड़ी, भारतीय सेना में बने कैप्टन, अब IIM में नई शुरुआत

IIT मंडी से इंजीनियरिंग और L&T की नौकरी के बाद अमर सिंहा यादव ने भारतीय सेना का रास्ता चुना. कैप्टन के रूप में सेवा देने के बाद अब उन्होंने IIM कलकत्ता में MBA की शुरुआत की है.

By: Munna Verma | Published: July 24, 2026 5:11:15 PM IST



IIM Success Story: हर साल हजारों इंजीनियरिंग छात्र प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई पूरी कर बड़ी कंपनियों में नौकरी पाने का सपना देखते हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो सुरक्षित करियर के बजाय अपने जुनून और उद्देश्य को चुनते हैं. IIT मंडी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने वाले कैप्टन अमर सिंहा यादव की कहानी इसी साहस और समर्पण की मिसाल है.

उन्होंने पहले Larsen & Toubro (L&T) में इंजीनियर के रूप में शानदार करियर बनाया, लेकिन बाद में नौकरी छोड़ भारतीय सेना में शामिल होने का फैसला किया. छह वर्षों तक सेना में सेवा देने के बाद अब उन्होंने IIM Calcutta में MBA Executive Program के जरिए अपने करियर का नया अध्याय शुरू किया है.

IIT Mandi से L&T तक का सफर

अमर सिंहा यादव ने वर्ष 2017 में IIT मंडी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्हें L&T में सीनियर इंजीनियर के रूप में काम करने का अवसर मिला. उनकी तैनाती संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर रही, जहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रोजेक्ट्स का अनुभव प्राप्त किया. यह करियर किसी भी युवा इंजीनियर के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है, लेकिन अमर को महसूस हुआ कि उनका लक्ष्य कुछ और है.

कॉर्पोरेट करियर छोड़ चुनी देश सेवा

स्थिर नौकरी, अच्छा वेतन और विदेश में काम करने के बावजूद अमर के मन में देश सेवा का सपना हमेशा जीवित रहा. उन्होंने कॉर्पोरेट जीवन छोड़ भारतीय सेना में शामिल होने का निर्णय लिया. उनका मानना था कि सेना केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्र सेवा का अवसर है. इसी सोच ने उन्हें पूरी तरह नई दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.

भारतीय सेना में निभाई अहम जिम्मेदारियां

साल 2019 में भारतीय सेना में शामिल होने के बाद अमर ने कठिन सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया और कॉम्बैट इंजीनियर ऑफिसर के रूप में कमीशन प्राप्त किया. सेना में उन्होंने 120 से अधिक सैन्य कर्मियों और 200 से ज्यादा नागरिक कर्मचारियों की टीम का नेतृत्व किया. उनकी जिम्मेदारियों में सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क निर्माण, सैन्य ढांचे का विकास, बर्फ हटाने के अभियान, जल स्रोत तैयार करना और अन्य रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य शामिल रहे. इसके अलावा उन्होंने सैनिकों के प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स और प्रशासनिक कार्यों की भी जिम्मेदारी संभाली.

आपदा राहत से लेकर रणनीतिक परियोजनाओं तक

अमर सिंहा यादव का योगदान केवल सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने असम पुलिस कमांडो को विशेष प्रशिक्षण दिया और बाढ़ राहत अभियानों में भी नेतृत्व किया. बाद में उन्होंने केरल के तटीय क्षेत्र में 500 करोड़ रुपये से अधिक की रक्षा अवसंरचना परियोजनाओं के समन्वय और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इन जिम्मेदारियों ने उनके नेतृत्व और निर्णय क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया.

अब IIM Calcutta में नई शुरुआत

सेना में छह वर्षों की सेवा के बाद अमर सिंहा यादव ने अब IIM Calcutta के Executive MBA Program में प्रवेश लिया है. उनका मानना है कि नेतृत्व केवल सेना तक सीमित नहीं होता. मैनेजमेंट की पढ़ाई के जरिए वे भविष्य में अपने अनुभवों का उपयोग बड़े संगठनात्मक और रणनीतिक नेतृत्व की भूमिकाओं में करना चाहते हैं.

युवाओं के लिए प्रेरणा

कैप्टन अमर सिंहा यादव की कहानी यह संदेश देती है कि सफलता का अर्थ केवल ऊंची सैलरी या विदेशी नौकरी नहीं होता. यदि व्यक्ति अपने उद्देश्य और जुनून को पहचान ले, तो वह किसी भी क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है. IIT की डिग्री, कॉर्पोरेट करियर, भारतीय सेना की सेवा और अब IIM Calcutta तक का उनका सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने करियर में केवल नौकरी नहीं, बल्कि अर्थपूर्ण योगदान देना चाहते हैं.

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