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Success Story: दिहाड़ी मजदूर के बेटे की बड़ी उड़ान, सेना के लिए तैयार किया ये खास ड्रोन, नहीं पकड़ पाएगा रडार

Success Story: हमीरपुर के राजकीय पॉलिटेक्नीक छात्र सर्वेश शर्मा ने सेना की निगरानी जरूरतों के लिए ड्रोन प्रोजेक्ट तैयार किया. रक्षा मंत्रालय ने 3.50 करोड़ की ग्रांट मंजूर की.

By: Munna Verma | Published: September 25, 2026 11:10:29 AM IST



Success Story: हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो सरकारी संस्थानों में पढ़ने वाले युवाओं के सपनों और प्रतिभा की ताकत दिखाती है. राजकीय पॉलिटेक्नीक कॉलेज हमीरपुर (बड़ू) के कंप्यूटर इंजीनियरिंग के छात्र सर्वेश शर्मा ने भारतीय सेना की सीमा निगरानी से जुड़ी चुनौती के समाधान की दिशा में एक ड्रोन विकसित किया है. उनके प्रोजेक्ट को रक्षा मंत्रालय से जुड़े डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (DIO) और इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (iDEX) के तहत 3.50 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर हुई है.

सर्वेश कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर के छात्र हैं. उनकी इनोवेशन यात्रा एक राष्ट्रीय स्तर की ड्रोन प्रतियोगिता से शुरू हुई. उन्होंने IIT जोधपुर और कोनार्क कोर की ओर से आयोजित ओपन कार्ड बोर्ड ड्रोन प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था. इस प्रतियोगिता में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों की करीब 50 टीमों ने अपने तकनीकी और इनोवेटिव आइडिया पेश किए थे. इसी दौरान भारतीय सेना की बॉर्डर सर्विलांस से जुड़ी जरूरतों पर चर्चा हुई. सर्वेश की टीम ने प्रतियोगिता में 10 लाख रुपये का चौथा पुरस्कार हासिल किया. इसके बाद उन्होंने सेना की इस चुनौती को अपने अगले प्रोजेक्ट के रूप में लेने का फैसला किया.

महज 87 हजार में तैयार किया शुरुआती प्रोटोटाइप

सर्वेश ने इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया और शुरुआती स्तर पर करीब 87 हजार रुपये खर्च किए. लगातार प्रयोग और तकनीकी मेहनत के बाद उन्होंने ऐसा ड्रोन तैयार करने में सफलता हासिल की, जिसे सीमा निगरानी में इस्तेमाल करने की दिशा में विकसित किया जा रहा है. प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए सर्वेश ने DIO और iDEX के तहत स्टार्टअप कार्यक्रम में आवेदन किया. अब इस प्रस्ताव को 3.50 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की मंजूरी मिल गई है.

IIT रुड़की की लैब में होगा आगे का काम

इस प्रोजेक्ट को आगे विकसित करने के लिए इसका इनक्यूबेशन सेंटर IIT रुड़की में बनाया गया है. रक्षा मंत्रालय की ओर से संबंधित औपचारिकताएं पूरी करने के लिए 20 दिन का समय दिया गया है. इसके बाद सर्वेश IIT रुड़की की लैब में प्रोजेक्ट पर काम करेंगे. इसे पूरा करने के लिए करीब 20 महीने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

सरकारी स्कूल से पढ़ाई, पिता करते हैं दिहाड़ी मजदूरी

सर्वेश की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उनका संबंध एक साधारण परिवार से है. उनके पिता संजीव शर्मा दिहाड़ी मजदूरी करते हैं. सर्वेश ने अपनी शुरुआती और स्कूली शिक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाहनवीं से पूरी की. एक सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाले सर्वेश ने अपनी तकनीकी सोच और मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पहचान बनाई और अब रक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रोजेक्ट पर काम करने का अवसर हासिल किया है.

सर्वेश की इस उपलब्धि पर राजकीय पॉलिटेक्नीक कॉलेज हमीरपुर के प्रधानाचार्य चंद्रशेखर, कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष समीर भारती और अन्य शिक्षकों ने उन्हें बधाई दी. उनकी सफलता युवा छात्रों के लिए यह संदेश देती है कि बड़े संस्थानों की कमी सपनों की राह में बाधा नहीं बनती, अगर प्रतिभा, मेहनत और सही दिशा साथ हो.

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