Engineering in Hindi: तकनीकी शिक्षा को मातृभाषा से जोड़ने की दिशा में मध्य प्रदेश ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. श्री गोविंदराम सेकसरिया प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (SGSITS) ने घोषणा की है कि शैक्षणिक सेशन 2026-27 से BTech Civil Engineering की पढ़ाई हिंदी माध्यम में शुरू की जाएगी. यह पहल उन छात्रों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी, जिन्हें अंग्रेजी भाषा के कारण इंजीनियरिंग की पढ़ाई कठिन लगती है.
संस्थान का उद्देश्य ग्रामीण और हिंदी माध्यम से पढ़ने वाले विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा में बेहतर अवसर देना है. खास बात यह है कि इस कोर्स में प्रवेश लेने वाले छात्रों को 2 लाख रुपये तक का प्रोत्साहन भी दिया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि मातृभाषा में पढ़ाई होने से छात्र विषय को अधिक आसानी से समझ पाएंगे और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा. यह फैसला तकनीकी शिक्षा को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
संस्थान प्रशासन के मुताबिक, हिंदी माध्यम से पूरे चार साल का कोर्स पूरा करने वाले छात्रों को अंतिम वर्ष में 2 लाख रुपये का विशेष प्रोत्साहन भी दिया जाएगा. माना जा रहा है कि यह योजना हिंदी भाषी छात्रों को तकनीकी शिक्षा की ओर आकर्षित करने में मदद करेगी.
30 नई सीटों के साथ बढ़ेगी कुल क्षमता
1952 में स्थापित SGSITS देश के पुराने और प्रतिष्ठित सरकारी सहायता प्राप्त इंजीनियरिंग कॉलेजों में शामिल है. फिलहाल संस्थान में Civil Engineering की 90 सीटें अंग्रेजी माध्यम में उपलब्ध हैं. अब हिंदी माध्यम की 30 अतिरिक्त सीटें जोड़ने के बाद कुल सीटों की संख्या बढ़कर 120 हो जाएगी. कॉलेज प्रशासन का मानना है कि इससे ग्रामीण और हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे. कई प्रतिभाशाली छात्र केवल अंग्रेजी की बाधा के कारण इंजीनियरिंग जैसे प्रोफेशनल कोर्स से दूर रह जाते हैं. नई व्यवस्था उन्हें आत्मविश्वास के साथ तकनीकी शिक्षा हासिल करने का मौका देगी.
सरकार ने बताया “ऐतिहासिक कदम”
मध्य प्रदेश के तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने इस पहल को “ऐतिहासिक कदम” बताया है. वह SGSITS की गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष भी हैं. उनका कहना है कि मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने से अलग-अलग सामाजिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि के छात्रों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति भी भारतीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर देती है और यह पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है.
चार साल से चल रही थी तैयारी
हिंदी माध्यम में इंजीनियरिंग पढ़ाई शुरू करना संस्थान के लिए आसान नहीं था. SGSITS पिछले चार वर्षों से इसकी तैयारी में जुटा हुआ था. इस दौरान AICTE द्वारा मंजूर पाठ्यपुस्तकों का हिंदी अनुवाद कराया गया और शिक्षकों को द्विभाषी शिक्षण पद्धति का प्रशिक्षण दिया गया. कॉलेज ने कई वर्कशॉप और ट्रेनिंग सेशन आयोजित किए, ताकि शिक्षक तकनीकी विषयों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रभावी तरीके से पढ़ा सकें.
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि, अधिकारियों ने माना कि हिंदी में तकनीकी शिक्षा देना अब भी चुनौतीपूर्ण है. सबसे बड़ी समस्या उच्च गुणवत्ता वाले हिंदी अध्ययन सामग्री की कमी है. इसके अलावा, संस्थान का BTech Biomedical कोर्स हिंदी में शुरू करने का पिछला अनुभव बहुत सफल नहीं रहा था, क्योंकि छात्रों की रुचि कम देखने को मिली थी. फिर भी प्रशासन को उम्मीद है कि Civil Engineering जैसे लोकप्रिय ब्रांच में छात्रों की भागीदारी अधिक होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल होता है, तो भविष्य में अन्य इंजीनियरिंग शाखाओं में भी हिंदी माध्यम की पढ़ाई शुरू की जा सकती है.