MBBS-BDS Admission: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने NITI Aayog की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया को लेकर राज्य का पुराना रुख दोहराते हुए NEET परीक्षा का विरोध किया. उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था ग्रामीण और सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों के लिए कई चुनौतियां पैदा कर रही है. इसी वजह से राज्य सरकार ने MBBS, BDS और AYUSH पाठ्यक्रमों में राज्य कोटे की सीटों पर प्रवेश के लिए 12वीं कक्षा के अंकों को आधार बनाने की मांग रखी है.
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि एकल राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा प्रणाली कई छात्रों के लिए अवसरों को सीमित कर रही है, विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए जो ग्रामीण क्षेत्रों या आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं. उनका मानना है कि मेडिकल शिक्षा तक पहुंच केवल प्रतियोगी परीक्षा के प्रदर्शन पर निर्भर नहीं होनी चाहिए. राज्य सरकार का तर्क है कि स्कूल स्तर पर वर्षों की शैक्षणिक मेहनत को भी उतना ही महत्व मिलना चाहिए जितना एक प्रवेश परीक्षा को दिया जाता है.
MBBS, BDS और AYUSH में 12वीं के अंकों से प्रवेश की मांग
तमिलनाडु सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया है कि राज्य कोटे की सभी सीटों पर प्रवेश NEET स्कोर की बजाय केवल 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर करने की अनुमति दी जाए. सरकार का मानना है कि इससे उन छात्रों को अधिक अवसर मिलेंगे जो बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं लेकिन प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षाओं में अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं कर पाते. यह प्रस्ताव मेडिकल और डेंटल शिक्षा में अधिक समावेशी और समान अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रखा गया है.
ग्रामीण और वंचित छात्रों की पहुंच बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि ग्रामीण जिलों और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों के लिए मेडिकल शिक्षा तक पहुंच बढ़ाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. उनका मानना है कि वर्तमान प्रवेश प्रणाली में बदलाव से शिक्षा के अवसर अधिक व्यापक और संतुलित बन सकते हैं.
2036 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
शिक्षा के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक विकास योजनाओं की भी रूपरेखा पेश की. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु 2036 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इसके लिए युवाओं, महिलाओं, किसानों और गरीब वर्गों को केंद्र में रखकर विकास योजनाएं तैयार की जा रही हैं.
युवाओं के लिए स्किल और रोजगार मिशन
राज्य सरकार ने एक महत्वाकांक्षी ‘युवा कौशल और रोजगार मिशन’ का भी प्रस्ताव रखा है. इसके तहत हर वर्ष लगभग पांच लाख युवाओं को स्टाइपेंड आधारित इंटर्नशिप और उद्योग से जुड़ी ट्रेनिंग प्रदान की जाएगी. साथ ही प्रत्येक जिले में आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर सेक्टर से जुड़े स्किल सेंटर स्थापित करने की योजना है.
NITI Aayog की बैठक में उठाया गया यह प्रस्ताव केवल NEET के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि मेडिकल शिक्षा में समान अवसर, ग्रामीण छात्रों की भागीदारी और शिक्षा प्रणाली में राज्यों की भूमिका को लेकर एक व्यापक बहस का हिस्सा है. आने वाले समय में केंद्र सरकार इस मांग पर क्या फैसला लेती है, इस पर देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों की नजरें टिकी रहेंगी.