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CBSE Three Language Policy: थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी क्या है? जानिए किस क्लास को देना होगा थर्ड लैंग्वेज का एग्जाम; इन छात्रों को मिली परमानेंट छुट्टी!

CBSE ने एक बार अपनी थ्री लैंग्वेज पॉलिसी में बड़े बदलाव किए हैं जिसमें 10वीं के छात्रों को आश्वासन दिया है कि उनकी पढ़ाई और एग्जाम पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा जबकि 7वीं, 8वीं और 9वीं क्लास के स्टूडेंट्स को 10वीं कक्षा में प्रवेश के लिए थर्ड लैंग्वेज की बोर्ड परीक्षा में छूट मिलेगी.

By: Kajal Jain | Published: June 30, 2026 4:53:53 PM IST



केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर अपनी नई गाइडलाइन जारी की है जिससे 50 लाख छात्रों को सीधे राहत मिलेगी. CBSE ने साफ किया है कि 10वीं में पढ़ने वाले छात्रों पर थ्री लैंग्वेज पॉलिसी का कोई असर नहीं पड़ेगा. वर्तमान बैच के छात्रों को 10वीं के बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा की परीक्षा नहीं देनी पड़ेगी. सीबीएससी का यह फैसला 13 मई को जारी किए गए थ्री लैंग्वेज पॉलिसी के सर्कुलर के जारी होने के बाद स्टूडेंट और पेरेंट्स के विरोध प्रदर्शन के बाद सामने आया है. इस मामले को लेकर कुछ पेरेंट्स ने सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी थी.

थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर CBSE के नए दिशानिर्देश

• कक्षा 10 के वर्तमान बैच के छात्रों को थ्री लैंग्नेज पॉलिसी का पालन नहीं करना होगा.
• कक्षा 7, 8 और 9 के वर्तमान बैच के छात्रों को भी 10वीं कक्षा में आने पर थर्ड लैंग्वेज की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी.
• कक्षा 7, 8 और 9 के वर्तमान बैच के जिन छात्रों ने पहले ही 2 विदेशी भाषाएं पढ़ी हैं, वो भारतीय भाषा के साथ पढ़ना जारी रखेंगे.
• थर्ड लैंग्वेज पॉलिसी का पालन करने के लिए कक्षा के अनुरूप संसाधन-सामग्री समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाएगी
• थर्ड लैंग्वेज सीखना छात्रों के लिए सार्थक, रुचिकर और ज्ञानवर्धक होगा, जो छात्रों के सर्वांगीण विकास में योगदान देगा.

क्या है थ्री लैंग्वेज पॉलिसी?

2020 की नई शिक्षा नीति के अनुसार, देश के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में छात्रों को 3 भाषाएं पढ़ाई और सिखाई जाएगी, जिसमें 2 भाषाएं भारत की होगी जबकि एक अन्य भाषा विदेशी हो सकती है.

  1. पहली भाषा के तौर पर स्टूडेंट की मातृभाषा/स्थानीय भाषा/क्षेत्रीय भाषा पढ़ाई जाएगी. स्टूडेंट की प्राइमरी एजुकेशन इसी भाषा में कराने की कोशिश रहेगी.
  2. दूसरी भाषा के तौर पर हिंदी या राज्य से संबंधित दूसरी भारतीय भाषा को पढ़ना अनिवार्य होगा.
  3. तीसरी भाषा के तौर पर अंग्रेजी/विदेशी भाषा या भारत की अन्य भाषा का चुनाव किया जा सकता है.

6वीं, 7वीं, 8वीं, 9वीं और 10वीं के नए बैच के लिए नियम?

सीबीएससी की नई गाइडलाइन्स के मुताबिक, बैच 2026-27 यानी नए बैच के छात्र पहले की तरह दो भाषाओं की परीक्षा देंगे. इस बैच पर थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू होगी इसलिए तीसरी भाषा की परीक्षा का प्रैशर नहीं होगा. इस बैच को थ्री लैंग्वेज पॉलिसी प्रभावित नहीं करेगी.

-9वीं क्लास के वर्तमान बैच 2026-27 के छात्रों को 3 भाषाएं पढ़नी होंगी, लेकिन थर्ड लैंग्वेज का एग्जाम नहीं देना है. 10वीं में प्रवेश के लिए या 10वीं के बोर्ड पास करने के लिए तीसरी भाषा की परीक्षा नहीं होगी.

-7वीं और 8वीं कक्षा के वर्तमान बैच 2026-27 के छात्रों को भी तीन भाषाएं पढ़नी होंगी लेकिन 10वीं के बोर्ड में तीसरी भाषा की परीक्षा नहीं देनी होगी.

-साल 2026-27 में 6वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों पर थर्ड लैंग्वेज पॉलिसी पूरी तरह से लागू होगी. इस बैच के स्टूडेंट को तीसरी भाषा पढ़नी भी है और हर साल एग्जाम भी देना है. 10 वीं के बोर्ड में भी तीसरी भाषा के एग्जाम देने होंगे.

-थर्ड लैंग्वेज पॉलिसी से दिव्यांग छात्रों, विदेश में सीबीएससी से स्कूल या स्वदेश वापसी करने वाले छात्रों को थर्ड लैंग्वेज नहीं पढ़नी है. यदि माता-पिता की नौकरी ट्रांसफर हो जाती है तो भी अपनी पुरानी भाषाएं पढ़ना जारी रख सकते हैं.

कौन-सी भाषाएं पढ़नी है और कंटेंट कहां से मिलेगा?

थर्ड लैंग्वेज पॉलिसी के तहत भारतीय भाषाओं के अलावा कुछ विदेशी भाषाओं को भी शामिल किया गया है जिसमें हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, पंजाबी, गुजराती, ओडिया और असमिया जैसी 22 राज्यावर और क्षेत्रीय भाषाएं शामिल की गई है, जबकि विदेशी भाषाओं में अंग्रेजी के अलावा फ्रेंच, जर्मन, अरबी और स्पेनिश का ऑप्शन दिया गया है. सभी भाषाओं की किताबें एनसीईआरटी की वेबसाइट पर उपलब्ध होंगी जहां से डाउनलोड करके हार्ड कॉपी निकलवा सकेंगे.

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