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CBSE छात्रों के लिए राहत, IIT की मंजूरी के बाद जल्द शुरू होगी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच

CBSE को री-इवैल्यूएशन पोर्टल के लिए अंतिम साइबर सुरक्षा मंजूरी मिल गई है. IIT विशेषज्ञों की जांच के बाद अब 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन जल्द शुरू होगा.

By: Munna Verma | Published: June 8, 2026 7:23:39 AM IST



CBSE Re-evaluation 2026: सीबीएसई के लाखों छात्रों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. लंबे इंतजार के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को अपने री-इवैल्यूएशन पोर्टल के लिए अंतिम साइबर सुरक्षा मंजूरी मिल गई है. IIT विशेषज्ञों की अगुवाई वाली टीम ने सुरक्षा परीक्षण का अंतिम चरण पूरा कर लिया है, जिसके बाद अब कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का रास्ता साफ हो गया है.

सूत्रों के अनुसार, IIT विशेषज्ञों ने शुक्रवार रात सिस्टम की अंतिम जांच पूरी की. इस दौरान पोर्टल में मौजूद सभी महत्वपूर्ण कमियों को दूर कर दिया गया. विशेषज्ञों ने पुष्टि की कि अब सिस्टम में ऐसी कोई बड़ी सुरक्षा खामी नहीं है जो री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया को प्रभावित कर सके. हालांकि टीमों को एहतियात के तौर पर स्टैंडबाय रखा गया है ताकि प्रक्रिया के दौरान यदि कोई नई तकनीकी चुनौती सामने आती है तो उसका तुरंत समाधान किया जा सके.

विवादित प्लेटफॉर्म से दूरी बनाकर अपनाया नया मॉडल

इस बार CBSE ने उस प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं करने का फैसला किया है जो पहले ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को संचालित कर रहा था और विवादों में रहा था. इसके बजाय बोर्ड ने छात्र और परीक्षा संबंधी डेटा को सीधे अपने नियंत्रण वाले इंफ्रास्ट्रक्चर पर स्थानांतरित किया है. री-इवैल्यूएशन की पूरी प्रक्रिया को नए सिरे से डिजाइन किया गया है ताकि डेटा सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके. इससे छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं और परीक्षा रिकॉर्ड की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी.

रेड टीम-ब्लू टीम मॉडल से हुई सुरक्षा जांच

इस पूरे ऑडिट में “रेड टीम-ब्लू टीम” रणनीति अपनाई गई. ब्लू टीम में CBSE के डेवलपर्स, IIT मद्रास और डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (DIC) के विशेषज्ञ शामिल थे, जिन्होंने सिस्टम की कमियों को दूर किया. वहीं IIT कानपुर की रेड टीम ने साइबर हमलावरों की भूमिका निभाते हुए सिस्टम में संभावित कमजोरियों को खोजने और उसमें सेंध लगाने की कोशिश की. इस प्रक्रिया ने पोर्टल की सुरक्षा को कई स्तरों पर परखा.

निष्पक्ष मूल्यांकन पर रहेगा पूरा फोकस

री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी. परीक्षक टैबलेट पर स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं देखेंगे और केवल उन्हीं प्रश्नों का मूल्यांकन करेंगे जिन्हें छात्र ने पुनर्मूल्यांकन के लिए चुना है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पुनर्मूल्यांकन करने वाले परीक्षकों को मूल परीक्षक द्वारा दिए गए अंक दिखाई नहीं देंगे. इससे निष्पक्षता बनी रहेगी और किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रह की संभावना कम होगी.

भविष्य के लिए अहम सबक

IIT विशेषज्ञ अब शिक्षा मंत्रालय और CBSE को सुझाव देने की तैयारी कर रहे हैं कि भविष्य में सभी परीक्षा संबंधी सॉफ्टवेयर शुरू से ही मजबूत साइबर सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर विकसित किए जाएं. साथ ही किसी भी सिस्टम को लागू करने से पहले स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा “रेड-टीमिंग” जैसी व्यापक सुरक्षा जांच अनिवार्य बनाई जाए. 

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