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Success Story: कभी हाथ में थी AK-47, अब थामी कलम, 3 पूर्व माओवादियों ने फर्स्ट डिवीजन से पास की 10वीं

Success Story: छत्तीसगढ़ के बस्तर में माओवादी संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौटे गीता नरोटे, अर्जुन ओयाम और संतोष अचला ने 10वीं की परीक्षा फर्स्ट डिवीजन से पास की.

By: Munna Verma | Published: October 2, 2026 1:30:19 PM IST



Bastar News: कभी जिन हाथों में हथियार हुआ करते थे, आज उन्हीं हाथों में किताबें और पेन हैं. छत्तीसगढ़ के बस्तर से सामने आई तीन युवाओं की कहानी सिर्फ परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि जिंदगी को नए सिरे से शुरू करने की कोशिश की कहानी है. माओवादी संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौटे गीता नरोटे, अर्जुन ओयाम और संतोष अचला ने 10वीं की परीक्षा फर्स्ट डिवीजन से पास की है.

इन तीनों ने छत्तीसगढ़ स्टेट ओपन स्कूल के जरिए अपनी औपचारिक शिक्षा को दोबारा आगे बढ़ाया. हिंसा और संगठनात्मक गतिविधियों से बाहर निकलने के बाद अब उनका लक्ष्य पढ़ाई पूरी करना और अपने भविष्य के लिए नई राह बनाना है.

35 साल की गीता अब बनना चाहती हैं नर्स

35 वर्षीय गीता नरोटे कभी माओवादी संगठन की डिवीजनल कमिटी का हिस्सा थीं. संगठन से जुड़ने के कारण वह बचपन में अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सकीं. लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और गीता शिक्षा को अपने नए जीवन की मजबूत नींव बनाना चाहती हैं. उनका सपना अब नर्स बनने और लोगों की सेवा करने का है. उनके लिए 10वीं पास करना केवल एक परीक्षा में सफलता नहीं, बल्कि उस शिक्षा को दोबारा हासिल करने का अवसर है जो बचपन में अधूरी रह गई थी.

अर्जुन और संतोष ने भी दोबारा शुरू की पढ़ाई

32 वर्षीय अर्जुन ओयाम और 31 वर्षीय संतोष अचला ने भी माओवादी संगठन से जुड़े रहने के दौरान शिक्षा प्राप्त की थी. दोनों ने संगठन के पॉलिटिकल स्कूल में पढ़ाई की, लेकिन उनका शैक्षणिक सफर नियमित रूप से आगे नहीं बढ़ सका. पुनर्वास के बाद दोनों ने लोकतांत्रिक माहौल में अपनी पढ़ाई फिर से शुरू की. अब अर्जुन का सपना शिक्षक बनने का है. वह अपने गांव लौटकर बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करना चाहते हैं. दूसरी ओर, संतोष आगे की पढ़ाई जारी रखते हुए किसान और कारोबारी बनने की योजना बना रहे हैं.

2025 में 210 पूर्व माओवादियों ने किया सरेंडर

बस्तर पुलिस के मुताबिक, वर्ष 2025 में क्षेत्र में 210 पूर्व माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया और सरकारी पुनर्वास व्यवस्था के तहत मुख्यधारा में लौटे. इनमें से सात लोगों ने 10वीं की परीक्षा पास की, जबकि तीन ने फर्स्ट डिवीजन हासिल किया. यह आंकड़ा बताता है कि पुनर्वास केवल हिंसा छोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा और रोजगार के जरिए सामान्य जीवन की ओर लौटने का अवसर भी प्रदान करता है.

शिक्षा के जरिए नई जिंदगी की ओर कदम

छत्तीसगढ़ प्रशासन के अनुसार, पुनर्वास कार्यक्रम के तहत पूर्व माओवादी और माओवादी गतिविधियों से जुड़े रहे लोगों को शिक्षा जारी रखने के लिए आवश्यक सहायता और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है. पुनर्वास केंद्रों में पढ़ाई की सामग्री भी मुफ्त दी जाती है. गीता, अर्जुन और संतोष के लिए 10वीं की यह सफलता एक नए सफर की शुरुआत है. उनकी कहानी यह दिखाती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन रही हों, शिक्षा और नए अवसर किसी व्यक्ति को अपने भविष्य की दिशा बदलने का मौका दे सकते हैं.

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