Aravind Srinivas Success Story: प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर की दौड़ में एक असफलता कई बार छात्रों को ऐसा महसूस करा देती है जैसे उनका पूरा भविष्य बदल गया हो. लेकिन अरविंद श्रीनिवास (Aravind Srinivas) की कहानी बताती है कि रिजेक्शन हमेशा मंजिल का फैसला नहीं होता. आज वह Perplexity AI के Co-founder और CEO हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने का रास्ता कई ‘नहीं’ से होकर गुजरा.
IIT Madras से लेकर दुनिया की प्रमुख AI लैब्स और फिर Perplexity बनाने तक, श्रीनिवास ने बार-बार अपने रास्ते खुद बनाए. आइए इनके बारे में नीचे विस्तार से जानते हैं.
IIT Madras में नहीं मिली पसंदीदा ब्रांच
श्रीनिवास का सपना IIT Madras में कंप्यूटर साइंस पढ़ने का था. हालांकि उनकी JEE रैंक उस ब्रांच की कटऑफ तक नहीं पहुंच सकी और उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग डुअल डिग्री में दाखिला लिया. IIT Madras के अनुसार उन्होंने 2017 में इसी विषय में डुअल डिग्री पूरी की.
बाद में उन्होंने ब्रांच बदलकर कंप्यूटर साइंस में जाने की कोशिश की, लेकिन जरूरी CGPA से मामूली अंतर से पीछे रह गए. यह झटका उनके लिए AI का रास्ता बंद करने की वजह नहीं बना. उन्होंने मशीन लर्निंग और AI में अपनी रुचि को खुद विकसित करना जारी रखा.
जब मशीन लर्निंग ने भी कहा ‘नहीं’
AI में दिलचस्पी बढ़ने के बावजूद शुरुआत में उन्हें मशीन लर्निंग से जुड़े एक कोर्स में जगह नहीं मिली. लेकिन उन्होंने इसे अपनी क्षमता की अंतिम सीमा नहीं माना. इसके बजाय खुद सीखने और रिसर्च पर ध्यान दिया. यही जिद आगे चलकर उनके करियर की सबसे बड़ी ताकत बनी। IIT Madras के बाद उन्होंने UC Berkeley से Computer Science में PhD की, जहां उनका शोध मशीन लर्निंग, रीइन्फोर्समेंट लर्निंग, ट्रांसफॉर्मर्स और विजन-लैंग्वेज मॉडल्स जैसे क्षेत्रों से जुड़ा रहा.
MIT का रिजेक्शन भी नहीं रोक पाया सफर
श्रीनिवास के सफर में एक और बड़ा झटका तब आया जब MIT से उनकी PhD एप्लीकेशन स्वीकार नहीं हुई. लेकिन उन्होंने इस रिजेक्शन को अपनी योग्यता का अंतिम फैसला नहीं बनने दिया. Berkeley में उन्होंने रिसर्च जारी रखी और आगे चलकर OpenAI, Google और DeepMind जैसी प्रमुख AI लैब्स में काम और रिसर्च अनुभव हासिल किया. यह अनुभव उनके लिए सिर्फ नौकरी का हिस्सा नहीं था, बल्कि AI की दुनिया को करीब से समझने का अवसर भी बना.
पहला स्टार्टअप फेल हुआ, फिर Perplexity बनी
OpenAI में Research Scientist के तौर पर काम करने के बाद भी सफलता सीधे नहीं मिली. Perplexity से पहले उनका एक Twitter सर्च प्रोडक्ट भी असफल हुआ. लेकिन उन्होंने इस असफलता को अगली कोशिश के लिए सीख में बदला. अगस्त 2022 में उन्होंने Perplexity की सह-स्थापना की. कंपनी ने AI और वेब सर्च को जोड़कर ऐसे उत्तर देने की दिशा में काम किया जिनमें स्रोतों के साथ जानकारी प्रस्तुत की जाती है. UC Berkeley के अनुसार, Perplexity तेजी से विकसित हुई और AI आधारित सर्च के क्षेत्र में प्रमुख नाम बनी.
छात्रों के लिए श्रीनिवास की कहानी का बड़ा सबक
उनकी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि एक रिजेक्शन आपकी पूरी क्षमता तय नहीं करता. पसंदीदा कॉलेज, ब्रांच या नौकरी न मिलना रास्ते का अंत नहीं, बल्कि दिशा बदलने का मौका भी हो सकता है.
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