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AI Success Story: सुप्रीम कोर्ट में थे क्लर्क, हजारों अदालतों में करा रहे AI का इस्तेमाल, अब TIME100 AI में मिली जगह

TIME100 AI 2026 में शामिल उत्कर्ष सक्सेना Adalat AI के जरिए भारतीय अदालतों में AI आधारित ट्रांसक्रिप्शन और केस मैनेजमेंट को नई दिशा दे रहे हैं.

By: Munna Verma | Published: August 31, 2026 11:26:26 AM IST



AI Success Story: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की चर्चा अक्सर बड़े लैंग्वेज मॉडल, चैटबॉट और अत्याधुनिक कंप्यूटिंग के इर्द-गिर्द होती है. लेकिन उत्कर्ष सक्सेना (Utkarsh Saxena) AI को एक ऐसे क्षेत्र यानी भारतीय न्याय व्यवस्था में इस्तेमाल कर रहे हैं, जहां इसका असर सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ सकता है. Adalat AI के को-फाउंडर और CEO उत्कर्ष सक्सेना को TIME की TIME100 AI 2026 सूची में जगह मिली है.

उनकी कहानी इसलिए खास है क्योंकि उनका रिश्ता अदालतों से केवल टेक्नोलॉजी के स्तर पर नहीं रहा. Adalat AI शुरू करने से पहले वह भारत के सुप्रीम कोर्ट में लॉ क्लर्क के रूप में काम कर चुके हैं.

कोर्टरूम की असली समस्या को करीब से समझा

अदालत में न्यायिक प्रक्रिया केवल बहस और फैसलों तक सीमित नहीं होती. इसके पीछे बड़ी मात्रा में रिकॉर्ड तैयार करना, कार्यवाही को दर्ज करना और मामलों के प्रवाह को व्यवस्थित रखना जैसे काम भी होते हैं. सक्सेना के अनुभव ने उन्हें यह समझने में मदद की कि इनमें से कई प्रक्रियाओं को AI की सहायता से अधिक कुशल बनाया जा सकता है. इसी सोच से Adalat AI ने ऐसे टूल विकसित किए जो कोर्टरूम ट्रांसक्रिप्शन और केस-फ्लो मैनेजमेंट में मदद करते हैं.

भारत जैसे बहुभाषी देश में यह काम आसान नहीं है. अदालतों में अलग-अलग भाषाएं, क्षेत्रीय उच्चारण और जटिल कानूनी शब्दावली इस्तेमाल होती है. इसलिए कोर्ट के लिए AI विकसित करना सामान्य स्पीच-टू-टेक्स्ट सिस्टम से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है.

AI जज की जगह नहीं, जज की मदद के लिए

Adalat AI का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका उद्देश्य न्यायिक निर्णय लेना नहीं है. अंतिम फैसला जज के हाथ में ही रहता है. AI का काम प्रशासनिक और दस्तावेजी बोझ को कम करने में सहायता करना है. यही अंतर न्यायपालिका में AI के इस्तेमाल को लेकर महत्वपूर्ण बनता है. तकनीक यहां निर्णय लेने वाले की भूमिका निभाने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और कुशल बनाने वाले सहायक के रूप में सामने आती है.

आंध्र प्रदेश में बड़े स्तर पर इस्तेमाल

इस पहल ने पायलट प्रोजेक्ट्स से आगे बढ़कर बड़े स्तर पर कदम रखा है. आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने जुलाई 2026 में घोषणा की कि 1 अक्टूबर से राज्य की जिला न्यायपालिका में Adalat AI को लागू किया जाएगा. कंपनी के अनुसार, इस योजना में 733 जिला कोर्टरूम शामिल होंगे और लाइव ट्रांसक्रिप्शन तथा केस-फ्लो मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. कंपनी का दावा है कि उसकी तकनीक पहले ही 11 राज्यों में 6,000 से अधिक जजों तक पहुंच चुकी है.

लॉ और AI का अनोखा मेल

सक्सेना की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी उनकी यात्रा को अलग बनाती है. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से BA/LLB, हार्वर्ड लॉ स्कूल से LLM और हार्वर्ड कैनेडी स्कूल से इंटरनेशनल डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स में मास्टर्स किया है. वह ऑक्सफोर्ड में पब्लिक पॉलिसी में PhD भी कर रहे हैं. उनकी कहानी यह संकेत देती है कि AI की दुनिया केवल कंप्यूटर साइंस विशेषज्ञों तक सीमित नहीं है. आने वाले समय में कानून, स्वास्थ्य, शिक्षा और सार्वजनिक नीति को समझने वाले पेशेवर भी AI के विकास में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.

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TIME100 AI 2026 की पहचान क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्कर्ष सक्सेना का TIME100 AI 2026 में शामिल होना इस बात की ओर इशारा करता है कि AI का प्रभाव केवल नए मॉडल बनाने तक सीमित नहीं है. असली बदलाव उन तकनीकों से भी आ सकता है जो रोजमर्रा की संस्थागत समस्याओं को हल करती हैं. सुप्रीम कोर्ट के क्लर्क से लेकर हजारों कोर्टरूम तक AI पहुंचाने की उनकी यात्रा दिखाती है कि जब तकनीक को किसी वास्तविक समस्या की गहरी समझ के साथ बनाया जाए, तो उसका प्रभाव सिर्फ स्क्रीन पर नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था के काम करने के तरीके पर दिखाई दे सकता है.

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