नई दिल्ली. 13 जुलाई को आंशिक सूर्य़ ग्रहण लगेगा. यानि शुक्रवार को चांद, सूर्य और धरती के बीच से गुजरेगा जिससे सूर्य आधा ढंक जाएगा. सूर्य ग्रहण को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं. पश्चिम में इस दिन को अशुभ और डरावना माना जाता है. हालांकि ये सूर्य ग्रहण वे लोग देख सकेंगें जो भारतीय महासागर के आसपास रहते हैं. लोगों को चेतावनी दी गई है कि वे खास लेंस की मदद से ही देखें ताकि आंखों पर गलत असर न पड़े.

सूर्य ग्रहण से जुड़ी आम मान्यताएं-
भारत में माना जाता है कि सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य के पूरी तरह न दिखने के कारण बैक्टेरिया और किटाणुओं की संख्या बढ़ जाती है. इसलिए लोगों को सूर्यग्रहण के दौरान खाना या पीना नहीं चाहिए. कई लोगों का मानना है कि इस दौरान मंत्रों का जप करना चाहिए और पूजा पाठ करनी चाहिए ताकि ग्रहण के नुकसान से बचा जा सके. कई लोग ग्रहण के बाद खुद के साफ करने के लिए नहकर नए कपड़े भी पहनते हैं.

अलग-अलग संस्कृति में ग्रहण को लेकर कई और मान्यताएं हैं. भारत में माना जाता है कि जब ग्रह राहू और केतू सूर्य़ और चांद को निगल लेते हैं तो सूर्य या चंद्र ग्रहण लगता है. लेकिन उसे ज्यादा देर तक अपने पास नही रख सकता.

वियतनाम में माना जाता है कि बड़ा मेंढक जब सूर्य को निगल लेता है तो सूर्य़ ग्रहण लगता है. नोर्स संस्कृतियों का मानना है कि भेड़िये सूर्य को खा जाते हैं, जबकि प्राचीन चीनी ने इसे निगलने और ग्रहण के लिए एक अजगर को दोषी ठहराया है. यूनानियों का मानना था कि सूर्य ग्रहण नाराज देवताओं का संकेत है और इसके नतीजे में प्राकृतिक आपदाएं आ सकती हैं.

कई संस्कृतियों में एक आम धारणा यह है कि गर्भवती महिलाओं और उनके नवजात शिशुओं के लिए ग्रहण खतरनाक हो सकता है. उम्मीदवार माताओं को घर से न निकलने को कहा जाता है. साथ ही उन्हें किसी भी काम को शुरू करने के लिए मना किया जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है.

टोगो और बेनिन के स्थानीय लोगों का मानना है कि ग्रहण सूर्य और चंद्रमा के बीच लड़कर होता है.

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