Delhi AIIMS News: दिल्ली एम्स के डायरेक्टर ने तन्वी के मामले की विस्तृत जांच करने, घटनाओं के क्रम की समीक्षा करने और तथ्यों का पता लगाने के लिए एक कमेटी बनाई है. तन्वी जन्म से ही दिल की एक जटिल बीमारी से पीड़ित थी और उसे इलाज के लिए AIIMS में भर्ती कराया गया था, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई.
2014 में, एक पिता ने अपनी बेटी की सर्जरी के लिए AIIMS में पैसे और खून जमा किए थे. उन्हें उम्मीद थी कि उनकी बेटी ठीक हो जाएगी, लेकिन 12 साल तक अस्पताल के चक्कर काटने के बावजूद सर्जरी नहीं हुई और 2026 में उनकी बेटी की मौत हो गई.
मिलती रहीं अपॉइंटमेंट की तारीखें
12 साल तक अपॉइंटमेंट की तारीखें मिलती रहीं और लंबा, दर्दनाक इंतज़ार चलता रहा, जबकि पिता अपनी बेटी के साथ AIIMS के चक्कर लगाते रहे. 2026 में उनकी 15 साल की बेटी की मौत हो गई. यह कहानी मुकेश परियानी और उनकी बेटी की है. पिता ने बेटी के इलाज को लेकर AIIMS पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
मुकेश के अनुसार, वह सबसे पहले 10 अक्टूबर 2012 को अपनी बेटी को AIIMS की OPD में ले गए थे. बच्ची को इलाज के लिए एक कमरे से दूसरे कमरे में भेजा गया और शुरुआती जांच में ही लगभग एक साल लग गया.
पैसे और खून जमा करने के लिए कहा गया
बाद में, उन्हें डॉ. सचिन तलवार के पास भेजा गया. पिता के अनुसार, डॉक्टर ने उनसे सर्जरी के लिए पैसे और खून जमा करने को कहा. उन्होंने 4 अप्रैल 2014 को पैसे और खून दोनों जमा कर दिए. इसके बाद, 2 सितंबर 2015 की अपॉइंटमेंट तारीख दी गई. पिता सर्जरी की उम्मीद में अस्पताल पहुंचे, लेकिन उन्हें बताया गया कि सर्जरी दिवाली के बाद होगी.
उनका आरोप है कि इसके बाद सर्जरी की तारीख बार-बार टाली जाती रही. उन्होंने PMO में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल बुलाया गया; हालांकि, उनका आरोप है कि डॉक्टर ने शिकायत वापस लेने तक सर्जरी करने से इनकार कर दिया.
2018 में फिर से तैयारी की गई. वे 2023 में दोबारा AIIMS गए और 2025 में एक और शिकायत दर्ज कराई. उन्हें 28 जुलाई, 2025 को अस्पताल बुलाया गया, लेकिन डॉक्टर छुट्टी पर थे. बाद में परिवार को बताया गया कि लड़की का इलाज दवा से किया जा सकता है.
9 फरवरी को दर्ज कराई थी एक और शिकायत
पिता ने 9 फरवरी, 2026 को एक और शिकायत दर्ज कराई. तैयारियां चलती रहीं, फिर भी उनके अनुसार सर्जरी कभी नहीं हुई और आखिरकार वह दिन आ ही गया, जिसका एक पिता को सबसे ज़्यादा डर होता है, उनकी 15 साल की बेटी का निधन हो गया.
अब मुकेश पूछते हैं कि अगर उनकी बेटी का इलाज 2015, 2016 या 2017 में सर्जरी से हो सकता था, तो इतने सालों तक वह क्यों नहीं की गई? क्या ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए?
अब यह देखना बाकी है कि AIIMS की जांच रिपोर्ट में किसे ज़िम्मेदार ठहराया जाता है और क्या मृतक लड़की के पिता मुकेश को न्याय मिल पाता है या नहीं.