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Sainbari Case: मां को थाली में परोसे थे बेटों के खून से सने चावल! बस कांग्रेस का समर्थन करना था कसूर; बंगाल का सबसे घिनौना हत्याकांड

West Bengal Dangerous Murder Case: चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में हो रहे विवाद और हिंसा ने लोगों को दहशत में डाल दिया है. हाल ही में पश्चिम बंगाल के होने वाले CM सुवेंदु अधिकारी के PA को भी सरेआम गोली मारकर उसकी हत्या कर दी जाती है,

By: Heena Khan | Published: May 9, 2026 9:43:25 AM IST



West Bengal Dangerous Murder Case: चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में हो रहे विवाद और हिंसा ने लोगों को दहशत में डाल दिया है. हाल ही में पश्चिम बंगाल के होने वाले CM सुवेंदु अधिकारी के PA को भी सरेआम गोली मारकर उसकी हत्या कर दी जाती है, इतना ही नहीं ममता की हार के बाद TMC और BJP के बीच अच्छा-खासा तनाव देखने को मिलता है. लेकिन आज हम आपको पश्चिम बंगाल का एक ऐसा कांड बताने जा रहे हैं जिसे जानने के बाद आपकी रूह कांप उठेगी. दरअसल, यहां एक भीड़ घर में घुस गई, और माँ की आँखों के सामने, दो बेटों को बुरी तरह मार दिया गया. और वजह सिर्फ ये थी कि वो एक अलग विचारधारा का समर्थन करते थे. सिर्फ इतना ही नहीं हद तो तब पार हुई जब उस महिला को अपने ही बेटों के खून से सने चावल खाने के लिए उकसाया गया. वहीं आज, जब पश्चिम बंगाल की राजनीति से एक और खूनी मामला सामने आया है. तो 17 मार्च, 1970 की उस ‘सेनबाड़ी घटना’ को लेकर चर्चाएँ फिर से शुरू हो गई हैं. चलिए जान लेते हैं कि ऐसा क्या हुआ जो आज तक पश्चिम बंगाल इस घटना को नहीं भूल पाया.

घर में ख़ुशी का माहौल और फिर… 

इस हैवानियत से भरी घटना का ज़िक्र वरिष्ठ पत्रकार अत्रि मित्रा द्वारा ‘द इंडियन एक्सप्रेस’  के लिए लिखे गए एक लेख में किया गया है. 2021 में प्रकाशित इस लेख में बताया गया है कि 17 मार्च, 1970 का दिन बर्दवान शहर के प्रतापेश्वर शिबतला लेन में स्थित सेनबाड़ी परिवार के लिए खुशियों भरा दिन होने वाला था. उस दिन, परिवार में एक नवजात बच्चे का नामकरण होना था, और इस मौके के लिए कई रिश्तेदार घर पर ख़ुशी में शामिल होने के लिए पहुंचे थे. लेख में बताया गया है कि घटना से ठीक एक दिन पहले, राज्य में संयुक्त मोर्चा सरकार गिर गई थी, और CPM जो उस गठबंधन का एक घटक दल था उसने आम हड़ताल का आह्वान किया था. नतीजतन, इलाके में तनाव का माहौल बनने लगा था.

माँ को खिलाए बेटों के खून से सने चावल 

17 मार्च की सुबह-सुबह, CPM द्वारा आयोजित एक विशाल रैली शिबतला लेन में घुस आई. बताया जाता है कि प्रदर्शनकारी भीड़ के कुछ सदस्य ज़बरदस्ती सेन परिवार के घर में घुस गए. बता दें कि ये परिवार कांग्रेस पार्टी का समर्थक था. बस इसी बात से खुंदक खाकर घर में आग लगा दी गई, और तीन लोगों की हत्या कर दी गई, जी हाँ! ये वो दिन था जब खुशी मातम के मंजर में बदल गई. सेन परिवार के दो भाई, मलय और प्रणब, और साथ ही परिवार के ट्यूटर, जितेंद्रनाथ रॉय. दोनों भाइयों की हत्या करने के बाद, हमलावरों ने कथित तौर पर उनकी माँ, मृगनयनी देवी को, अपने ही बेटों के खून से सने चावल खाने के लिए मजबूर किया. इसके अलावा लेख में बताया गया कि नबा सेन घर के सबसे बड़े बेटे, जो घटना के समय वहीं मौजूद थे उनकी एक साल बाद हत्या कर दी गई. यही नहीं, उनकी आँखें भी निकाल ली गई थीं.

जब बरी हुए सारे आरोपी 

इस नृशंस हत्याकांड की प्रत्यक्षदर्शी स्वर्णलता जश ने 2013 में द टाइम्स ऑफ़ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि हत्याओं और हमले के बाद, CPM समर्थकों ने तो घर से एक विजय जुलूस भी निकाला था. रिपोर्टों के अनुसार, उस समय दर्ज की गई FIR में 83 लोगों को आरोपी माना गया था. जिनमें निरुपम सेन और बिनॉय कोनार जैसे वरिष्ठ CPM नेता भी शामिल थे. मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि 1978 में, अदालत ने सभी 83 आरोपियों को बरी कर दिया था.

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