गुजरात के वडोदरा से एक ऐसी सनसनीखेज और हिला देने वाली कहानी सामने आई है, जिसने न्यायपालिका और पुलिस महकमे दोनों को हैरान कर दिया है. साल 2021 में हुए चर्चित स्वीटी पटेल मर्डर केस में अदालत ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी पुलिस इंस्पेक्टर ए.ए. देसाई को उम्रकैद की सजा सुनाई है. इस खौफनाक मामले की सबसे बड़ी अजीब बात यह थी कि पुलिस के पास हत्या साबित करने के लिए कोई साबुत लाश तक नहीं थी, क्योंकि कातिल ने सबूत मिटाने के लिए शव को इस तरह जला दिया था कि डीएनए टेस्ट के लिए हड्डियां भी नहीं बचीं. इतना ही नहीं, केस को रफा-दफा करने के लिए मृतका के अपने भाई समेत 40 से ज्यादा गवाह मुकर गए और हॉस्टाइल हो गए. इसके बावजूद, एक पिघला हुआ मंगलसूत्र, सोने की चूड़ियां और ऑस्ट्रेलिया में रह रहे पहले पति की गवाही ने ऐसा चक्रव्यूह रचा कि खाकी पहनकर जुर्म करने वाला वह दबंग इंस्पेक्टर कानून के शिकंजे से बच नहीं सका.
छिपकर की थी शादी, हक मांगने लगी तो किया कांड
यह पूरी दर्दनाक दास्तान साल 2017 की है, जब एसओजी (SOG) में तैनात पुलिस इंस्पेक्टर ए.ए. देसाई और स्वीटी पटेल के बीच लिव-इन रिलेशनशिप था. दोनों ने एक मंदिर में चुपचाप शादी कर ली थी. देसाई की पहले से शादी हो चुकी थी और वो पहले से अहमदाबाद में अपनी पत्नी और बेटी के साथ रहता था. देसाई और स्वीटी का साल 2019 में एक बेटा भी हुआ, लेकिन उसने स्वीटी और उसके बेटे के वजूद को दुनिया से छिपाया. इसी बात को लेकर स्वीटी परेशान थी. वो देसाई से कानूनी पत्नी का दर्जा और समाज के सामने स्वीकार्यता चाहती थी. इसी जिद और हक की मांग ने 4-5 जून 2021 की रात को इंस्पेक्टर देसाई ने अपने ही घर में स्वीटी का गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी.
लाश ठिकाने लगाने के लिए अपनाया खौफनाक तरीका
हत्या करने के बाद शातिर पुलिस इंस्पेक्टर देसाई ने सबूत मिटाने के लिए अपने दोस्त और राजनेता सह-होटल व्यवसायी कीरिटसिंह जाडेजा की मदद ली. उसके साथ मिलकर स्वीटी के शव को अपनी ही जीप में लादा और वडोदरा के पास अटाली गांव में एक बंद पड़ी सुनसान होटल के परिसर में ले गए. वहां पेट्रोल डालकर से शव को इतनी बुरी तरह जला दिया गया कि उसकी हड्डियां और शरीर राख में तब्दील हो गए. हैरानी की बात यह है कि खुद पुलिस अफसर होने के बावजूद देसाई ने छह दिन बाद यानी 11 जून को करजान थाने में खुद ही गुमशुदगी की झूठी शिकायत दर्ज करा दी, ताकि किसी को शक न हो.
भाई और अपने ही लोग मुकर गए गवाही से
इस हाई-प्रफाइल केस में ट्विस्ट तब आया जब ट्रायल के दौरान 128 में से 40 से ज्यादा गवाह अपने बयानों से पलट गए. यहां तक कि मृतका का भाई जयदीप पटेल, जो इस केस का मुख्य शिकायतकर्ता और पहला इन्फॉर्मेंट था, वह भी अदालत में होस्टाइल हो गया. इसके अलावा, कई पंच गवाह और खुद मृतका के सौतेले भाई ने भी मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयानों से यू-टर्न ले लिया. अभियोजन पक्ष के लिए यह सबसे बड़ा झटका था कि जिन अपनों को गवाही देकर कातिल को सजा दिलानी थी, वे दबाव या कारणों से मुकर चुके थे. लेकिन जज एम.बी. कोटक ने स्पष्ट किया कि गवाहों के पलटने से पुलिस की रिकवरी और जांच की विश्वसनीयता खत्म नहीं होती.
पिघला हुआ मंगलसूत्र और सोना बना सबसे बड़ा सबूत
चूंकि जलाने के कारण हड्डियों का डीएनए सैंपल मैच नहीं हो सका और बिना लाश के मर्डर केस का मामला था, इसलिए कोर्ट ने वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य सबूतों का सहारा लिया. एफएसएल (FSL) विशेषज्ञों को घटनास्थल से एक पिघला हुआ मंगलसूत्र और सोने की चूड़ियां मिलीं. जब उनका मिलान स्वीटी पटेल की पुरानी तस्वीरों में पहने गए गहनों से किया गया, तो वे बिल्कुल सटीक बैठ गए. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले स्वीटी के पूर्व पति और उनके बेटे की गवाही ने भी इस बात की पुष्टि की कि देसाई के अपनी शादी को बाहर न लाने को लेकर स्वीटी गहरी चिंता और तनाव में थी.
कॉल डिटेल्स और जीप की लोकेशन ने खोले राज
जांच आगे बढ़ी तो मोबाइल टावर लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) ने इंस्पेक्टर देसाई और होटल व्यवसायी कीरिटसिंह जाडेजा के काले कारनामों की पोल खोल दी. टावर डेटा से साबित हो गया कि हत्या की रात देसाई और जाडेजा दोनों अटाली गांव के उसी सुनसान होटल के पास मौजूद थे. साथ ही, अगली सुबह देसाई की जीप का घर में उल्टी दिशा में पार्क होना और स्वीटी का लगातार इस्तेमाल होने वाला मोबाइल फोन घर पर ही छूटा मिलना, इन सभी कड़ियों को जोड़कर कोर्ट ने माना कि यह कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि सोची-समझी साजिश थी.
अदालत ने सुनाई उम्रकैद, साथी भी खाएगा जेल की हवा
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वडोदरा के 8वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एम.बी. कोटक ने 72 पन्नों के अपने ऐतिहासिक फैसले में आरोपी पुलिस इंस्पेक्टर ए.ए. देसाई को भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत हत्या और सबूत मिटाने का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) और 2 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. वहीं, सबूत छुपाने में मदद करने वाले सह-आरोपी कीरिटसिंह जाडेजा को 5 साल की कठोर कारावास और 2 लाख रुपये के जुर्माने की सजा दी गई.