गुजरात के गांधीनगर और अहमदाबाद में कपल्स को अपना निशाना बनाने वाले 24 साल के सीरियल किलर विपुल परमार उर्फ नील परमार का आतंक अब खत्म हो चुका है. पुलिस ने एक एनकाउंटर में सुनसान इलाकों में प्रेमी जोड़ों और शादीशुदा जोड़ों पर जुल्म ढाने वाले इस खूंखार अपराधी का अंत कर दिया. लेकिन एक समय वो भी था, जब लोग इस खूंखार अपराधी के डर से सुनसान इलाके से गाड़ी निकालने से भी डरते थे. इस आरोपी का पर्दाफाश उस वक्त हुआ, जब नवरात्रि के एक दिन पहले की शाम को अंबापुर नर्मदा कैनाल के पास जन्मदिन मना रहे 25 साल के वैभव मनवानी की बेरहमी से हत्या कर दी थी और उनकी गर्लफ्रेंड को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया था. अपराध का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका, बल्कि जब पुलिस उसे क्राइम सीन रीक्रिएशन के लिए ले गई, तो वह कस्टडी से भागने की कोशिश में पुलिसकर्मी की पिस्तौल छीनकर भागने लगा और जवाबी कार्रवाई में मारा गया. इस शातिर अपराधी पर 18 से ज्यादा संगीन मामले दर्ज थे लेकिन इसे पकड़ने की कहानी भी उतनी ही रोमांचक और सिरहन पैदा करने वाली थी.
कौन है सीरियल किलर विपुल परमार?
विपुल परमार मूल रूप से अहमदाबाद के नारोदा का रहने वाला था, जो बाद में देहगम और अलग-अलग इलाकों में रहने लगा था. उसके परिवार में पिता सीआरपीएफ (CRPF) में थे जिन्होंने दूसरी शादी कर ली थी. सौतेली मां उसकी शादी नहीं होने देती थी जिसके कारण घर में क्लेश और झगड़े की स्थिति बनी रहती थी. रोजाना के मानसिक तनाव और अकेलेपन ने उसे अंदर तक डिस्टर्ब कर दिया था. यही कारण है कि वह समय के साथ युवाओं और कपल्स से नफरत करने लगा था. उस पर आर्म्स एक्ट और हत्या के प्रयास सहित करीब 18 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे. वह पहले भी एक ऐसे ही मामले में जमानत पर बाहर आया था और समाज व कपल्स के प्रति गहरी दुश्मनी की भावना रखता था.
क्यों बना सीरियल किलर?
विपुल के सीरियल किलर बनने के पीछे पारिवारिक परेशानियां और मानसिक असंतुलन मेन कारण थे. परिवार की उपेक्षा और खुद की शादी न हो पाने के कारण उसके मन में कपल्स के प्रति गहरा गुस्सा और नफरत भर गई थी. वह सुनसान जगहों पर अकेले बैठने वाले प्रेमी जोड़ों को देखकर चिढ़ता था और उन्हें अपना आसान शिकार बनाता था. इसी मानसिक विकृति के चलते वह लगातार वारदातों को अंजाम देता रहा और धीरे-धीरे एक खूंखार सीरियल क्रिमिनल बन गया.
क्राइम करने का तरीका क्या था?
विपुल का क्राइम करने का तरीका बहुत ही खतरनाक था. वह बाइक पर घूमकर गांधीनगर और अहमदाबाद के सुनसान रास्तों, विशेषकर नहरों के पास बैठने वाले कपल्स की रैकी करता था. वह अचानक बाइक से उतरकर या चुपचाप पैदल आकर कारों को निशाना बनाता था. शुरुआत में वह लूटपाट के इरादे से पहुंचता था, लेकिन विरोध करने पर वह हिंसक हो जाता था और अपने पास छिपाए हुए चाकू से ताबड़तोड़ वार कर देता था. उसने वैभव मनवानी की कार का दरवाजा जबरन खोलकर उन पर और उनकी महिला मित्र पर चाकू से एक के बाद एक कई वार किए थे.
कब और किस मामले के चलते चर्चा में आया?
विपुल तब देश भर की सुर्खियों में आया जब उसने 19 सितंबर को नवरात्रि से ठीक पहले रात के वक्त अंबापुर कैनाल के पास कार में बैठे वैभव मनवानी और उनकी महिला मित्र पर बर्बर हमला किया. वैभव की मौके पर ही मौत हो गई और उनकी दोस्त गंभीर रूप से घायल हो गई. इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद गुजरात पुलिस, क्राइम ब्रांच और एटीएस हरकत में आ गई. इस जघन्य हत्याकांड ने पूरे राज्य में खौफ पैदा कर दिया था, जिसके बाद इसे एक हाई-प्रायोरिटी केस बना दिया गया.
पुलिस ने कैसे दबोचा
इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने के लिए अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की टीम ने रात-दिन एक कर दिया. घायल महिला ने संघर्ष के दौरान हमलावर के चेहरे पर बनाए गए नाखूनों के निशान और सीसीटीवी फुटेज इस केस का सबसे बड़ा क्लू साबित हुए. पुलिस की कई टीमों ने नहरों के पास, उसके रिश्तेदारों के यहां और संदिग्ध ठिकानों पर जाल बिछाया. आखिरकार, पीआई माधुरी गोहेल और उनकी टीम ने राजकोट में छुपे बैठे विपुल परमार को ट्रैक किया और आधा किलोमीटर तक खदेड़कर उसे धर दबोचा. इसके बाद जब पुलिस उसे पूछताछ और क्राइम सीन रीक्रिएशन के लिए वापस लाई, तो उसने पुलिसकर्मी की पिस्तौल छीनकर भागने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया.