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धर्म बदलने के लिए बनाया दबाव, फिर जबरन लिया इस्तीफा… थाने पहुंचा पुणे की IT कंपनी का विवाद, महिला ने ठोका ₹50 लाख का दावा!

पुणे के हिंजवाड़ी में पूर्व आईटी कंपनी की एक महिला कर्मचारी के आरोप हैं कि कंपनी में एक सहकर्मी ने उस पर जबरन धर्म बदलने का दबाव बनाया और जब वो कंपनी प्रशासन के बाद शिकायत लेकर पहुंची तो एक्शन लेने के बजाए उसे कंपनी से निकाल दिया गया. इस विवाद के बाद महिला ने न सिर्फ कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा है बल्कि कंपनी से नुकसान के लिए ₹50 लाख का दावा भी किया है.

By: Kajal Jain | Last Updated: June 4, 2026 11:47:00 AM IST



पुणे के हिंजवड़ी स्थित आईटी सेक्टर से एक पूर्व महिला कर्मचारी द्वारा धार्मिक उत्पीड़न, धर्म परिवर्तन के लिए दबाव और जबरन इस्तीफा दिलाने का मामला सामने आया है. महिला का आरोप है कि उसने इस संबंध में हिंजवड़ी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है. मामले को लेकर बुधवार को पुणे के श्रमिक पत्रकार भवन में एक प्रेस कांफ्रेंस भी बुलाई गई थी, जिसमें महिला ने अपनी पूरी आपबीती सुनाई.

क्या है पूरा मामला?

मीडिया से बातचीत के दौरान महिला ने बताया कि वह आईटी कंपनी विप्रो (Wipro) में कार्यरत थी, जहां उसकी एक सहकर्मी ने उस पर इस्लाम धर्म स्वीकार करने और एक मुस्लिम व्यक्ति के साथ संबंध बनाने के लिए लगातार दबाव बनाया. महिला के अनुसार, उसने उत्पीड़न की शिकायत कंपनी प्रबंधन और वरिष्ठ अधिकारियों से की थी, लेकिन उसकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई.

शिकायत पर नौकरी से निकाला

महिला का आरोप है कि शिकायत पर एक्शन लेने के बजाए उसी के खिलाफ कार्रवाई को अंजाम दिया गया और उसे नौकरी से बाहर कर दिया गया. प्रेस कांफ्रेस में संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कंपनी प्रबंधन ने संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की और शिकायतकर्ता का पक्ष नजरअंदाज किया. महिला ने यह भी दावा किया कि अगस्त 2025 में एक ऑनलाइन मीटिंग के दौरान उसकी सहमति के बिना तकनीकी माध्यम से उसका इस्तीफा जमा कराया गया.

कंपनी को भेजा कानूनी नोटिस

मीडिया से बातचीत के दौरान महिला ने बताया कि उसने कंपनी को कानूनी नोटिस भेज दिए हैं. नोटिस में कथित मानसिक उत्पीड़न और प्रतिष्ठा को हुई क्षति के लिए 50 लाख रुपये के मुआवजे, इस्तीफे को निरस्त करने, सेवा में बहाली तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. इस मामले में महिला के वकील विवेक भोसले ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी से दबाव में इस्तीफा लिया गया है तो यह श्रम कानूनों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध माना जा सकता है.

न्याय नहीं मिला तो कोर्ट जाएंगे

महिला के कंपनी पर लगाए आरोपों की अभी तक कोई भी पुष्टि नहीं हो पाई है. हालांकि प्रेस कांफ्रेंस में प्रेजेंट संगठन के प्रतिनिधियों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित अवधि में उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे श्रम न्यायालय तथा अन्य कानूनी मंचों का दरवाजा खटखटाएंगे. हालांकि अभी तक इस मामले में न तो कंपनी की ओर से कोई ऑफिशियल स्टेटमेंट मिला है और न ही पुलिस की जांच से जुड़ा कोई बयान सामने आया है. 

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