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Odisha Cyber Crime: डिजिटल अरेस्ट से ठगी के शिकार प्रोफेसर को वापस मिले 1.10 करोड़ रुपये, आप भी रहें सतर्क, की गई ये अपील

Odisha Cyber Crime: अधिकारियों ने लोगों को 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे साइबर फ्रॉड से सावधान रहने की सलाह दी है. इस प्रकार की ठगी में अपराधी स्वयं को पुलिस, सीबीआई, कस्टम्स या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो या ऑडियो कॉल करते हैं.

By: Hasnain Alam | Published: June 24, 2026 8:40:20 PM IST



Odisha Cyber Crime News: ओडिशा पुलिस की साइबर अपराध इकाई ने एक बड़े साइबर धोखाधड़ी मामले में पीड़ित को 1.10 करोड़ रुपये की राशि वापस दिलाने में सफलता हासिल की है. यह कार्रवाई 1930 साइबर हेल्पलाइन और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग प्रणाली के माध्यम से की गई. जानकारी के अनुसार, भुवनेश्वर के एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वे तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी का शिकार हो गए थे.

शिकायत में करोड़ों रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था. मामले की जांच के दौरान साइबर पुलिस ने संदिग्ध बैंक खातों और लेनदेन की विस्तृत पड़ताल की. जांचकर्ताओं ने धनराशि के प्रवाह का विश्लेषण कर कई लाभार्थी खातों की पहचान की और संबंधित बैंकों से संपर्क कर रकम को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए.

पीड़ित के खाते में वापस स्थानांतरित की गई राशि

इसी प्रक्रिया में एक बैंक खाते में मौजूद 1.10 करोड़ रुपये की विवादित राशि को चिन्हित कर रोक दिया गया. बाद में न्यायालय की आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के उपरांत उक्त राशि पीड़ित के खाते में वापस स्थानांतरित कर दी गई. अधिकारियों का कहना है कि समय पर शिकायत दर्ज होने और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय के कारण यह रिकवरी संभव हो सकी.

साइबर अपराध शाखा के अनुसार, राज्य में साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है. ऐसे मामलों में त्वरित शिकायत दर्ज कराने से धनराशि को फ्रीज करने और रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है.

साइबर फ्रॉड से सावधान रहने की दी गई सलाह

अधिकारियों ने लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे साइबर फ्रॉड से सावधान रहने की सलाह दी है. इस प्रकार की ठगी में अपराधी स्वयं को पुलिस, सीबीआई, कस्टम्स या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो या ऑडियो कॉल करते हैं. वे झूठे आरोप लगाकर लोगों में भय पैदा करते हैं और उनसे धनराशि ट्रांसफर कराने का प्रयास करते हैं.

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी वैध सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से जांच नहीं करती और न ही किसी व्यक्ति को तथाकथित ‘सुरक्षित खाते’ में पैसा जमा करने का निर्देश देती है. ऐसे किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की स्थिति में नागरिकों को घबराने के बजाय तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करने या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है.

(अक्षय महाराणा की रिपोर्ट)

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