हांगझू. G-20 देशों के नेताओं का शिखर सम्मेलन तो पूरा हो गया पर एक बड़ा सवाल पीछे छोड़ गया और वो ये कि भारत और चीन का रिश्ता भविष्य में क्या करवट लेगा?  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति के बीच मुलाकात हुई बात भी हुई पर भारत को लेकर चीन के नजरिए में कोई खास फर्क नहीं दिख रहा. क्योंकि एक तरफ तो चीन भारत के साथ बेहतर रिश्ते की बात करता है और दूसरी ओर सरहदी इलाकों में उसकी गुपचुप हरकतें भी जारी हैं. 
 
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चीन ने J-20 फाइटर विमान को अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटे तिब्बत में तैनात किया गया है. ये चीन के सबसे ताकतवर लड़ाकू विमानों में से एक J-20 फाइटर विमान है. यह एक ऐसा फाइटर प्लेन है जो आसमान में 1300 मील प्रति घंटे की रफ्तार से भी तेज उड़ान भर सकता है और अपने साथ कम से कम छह मिसाइलें कैरी कर सकता है.
 
 
चीन ने ये सीक्रेट फाइटर विमान अरुणाचल की सीमा से बस कुछ ही दूरी पर तिब्बत में तैनात किया गया है. ये विमान दाओचेंग एयरपोर्ट पर खड़ा है, जिसे बारिश और बर्फ से बचाने के लिए तारपेलिन यानी एक खास किस्म के कपड़े से ढककर रखा गया है. दरअसल मोदी सरकार ने जब से अरुणाचल के सरहदी इलाकों में ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात करने का फैसला किया है. चीन तभी से खार खाये हुए है. 
 
J-20 विमान क्यों है खास ?
J-20 चीन का वो लड़ाकू विमान है जिसे फिफ्थ जेनरेशन का बेहतरीन फाइटर प्लेन माना जाता है. ये न तो रडार पर नजर आता है और न ही कोई इस विमान की टोह ले सकता है. ताकत और तकनीक के मामले में चीन के J-20 की तुलना अमेरिका के अत्याधुनिक फाइटर प्लेन एफ-22 रैप्टर और एफ-35 लाइटनिंग-2 जैसे लड़ाकू विमानों से की जाती है.
 
रूस की मदद से बना J-20 लड़ाकू विमान चीन का फ्रंट लाइन फाइटर प्लेन है. ये हवा से हवा में और जमीन पर दोनों जगह बेहद सटीक निशाना लगाने में सक्षम है. J-20 पर लंबी दूरी तक मार करने वाली 4 मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं. इसके अलावा इस पर कम दूरी तक मार करने वाली 2 मिसाइलें लोड की जा सकती हैं. इस विमान को जनवरी 2014 में पहली बार लॉन्च किया गया था. भारत के पास J-20 टाइप के विमान अभी नहीं हैं.
 
ब्रह्मोस में क्या है खूबी ?
ब्रह्मोस भारत-रूस के ज्वॉइंट वेंचर से देश में ही बनाई गई एक सुपर सोनिक एंटी शिप मिसाइल है. यह दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइल है. इसकी स्पीड अमेरिकी सबसोनिक टॉमहॉक क्रूज मिसाइल से तीन गुना ज्यादा 2.8 मैच है. यह मिसाइल 300 किलो वारहेड के साथ 290 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकती है.
 
सरफेस-टू-सरफेस पर मार करने वाली इस मिसाइल को सबमरीन, शिप और प्लेन से भी दागा जा सकता है. सी और सरफेस से मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल को इंडियन आर्मी और नेवी में शामिल किया जा चुका है. भारत इसके सबमरीन से लांच किए जाने वाले वर्जन के दो सक्सेसफुल टेस्ट कर चुका है. इस मिसाइल को वियतनाम की किलो-क्लास सबमरीन में भी यूज किया जा सकता है.
 
चीन के J-20 विमान पर इंडिया न्यूज़ के एडिटर-इन-चीफ दीपक चौरसिया की खास रिपोर्ट देखिए

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