नई दिल्ली. G-20 समिट से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वियतनाम दौरे पर जाने से चीन ने आखें टेड़ी कर लीं हैं. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित लेख में दोनों देशों के बीच हुए 1962 के युद्ध में मिली हार की याद दलाई. ग्लोबल टाइम्स ने अपने लेख में भारत और वियतनाम के साथ सीमा विवाद का जिक्र करते हुए कहा गया कि दोनों देशों के बीच हुए युद्ध में भारत के पास हार का कड़वा इतिहास रहा है.
 
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अमेरिका-जापान चीन का कुछ नहीं करपाए तो भारत..
चीनी अखबार में भारत और वियतनाम की नई दोस्ती पर टिप्पणी करते हुए लिखा है कि इस तरह के द्विपक्षीय रिश्ते से चीन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. जब अमेरिका और जापान की ओर से वियतनाम को सपॉर्ट किए जाने पर चीन पर कोई दवाब नहीं पड़ा तो फिर भारत के मामूली सपॉर्ट से क्या फर्क पड़ता है.
 
 
भारत सीधे तौर पर कुछ नहीं कहता चीन को
लेख में चीन के प्रति भारतीय नीति का जिक्र करते हुए कहा गया कि अमेरिका अक्सर भारत को अपनी रणनीति के तहत इस्तेमाल करने की कोशिश करता रहा है. लेकिन भारत ने हमेशा अमेरिका की ओर से ऐसी किसी पहल का उत्साहजनक जवाब नहीं दिया है. भारत हमेशा से सीधे तौर पर चीन के मुकाबले में उतरने से बचता रहता है. लेख में आगे लिखा है कि वियतनाम और भारत ने एक साथ आकर चीन के मुकाबले अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की है लेकिन दोनों देश चीन से नहीं भिड़ना चाहते.
 
भारतीय मीडिया को कोसा
चीनी अखबार ने भारतीय मीडिया की भी जमकर आलोचना की. अखबार ने लिखा है कि मोदी के वियतनाम दौरे को भारतीय मीडिया ने रोमांचक अंदाज में पेश किया और ऐसा संकेत देने की कोशिश की जैसे भारत साउथ चाइना सी में आक्रामक भूमिका अदा करने जा रहे हैं. भारतीय मीडिया हमेशा से भारत और चीन के बीच किसी भी विवाद को हाइप देने के लिए मौके की तलाश में रहता है.

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