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‘न डरूंगी, न झुकूंगी… सिर्फ हम पर ही क्यों नकेल?’ ऑनलाइन अटेंडेंस ऐप पर भड़की छत्तीसगढ़ की शिक्षिका, CM को दी खुली चुनौती!

रायगढ़ की शिक्षिका ने ऑनलाइन अटेंडेंस पर सवाल उठाते हुए सभी प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी हाजिरी ऐप्लीकेशन पर दर्ज करने की मांग की. सिर्फ शिक्षकों के लिए लागू इस व्यवस्था पर नाराजगी जताई है. यह मामला सोशल मीडिया पर तूल पकड़ रहा है.

By: Kajal Jain | Last Updated: September 3, 2026 10:05:53 AM IST



छत्तीसगढ़ से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है और शिक्षा विभाग से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक हलचल पैदा कर दी है. मामला छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का है जहां एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका ने स्कूलों में शिक्षकों के लिए अनिवार्य की गई ऑनलाइन अटेंडेंस व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. 29 अगस्त को सुबह करीब 11 बजे बनाए गए इस वीडियो में शिक्षिका ने बेहद बेबाक अंदाज में सीधे राज्य के मुख्यमंत्री और कलेक्टर को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने सवाल उठाया है कि आखिर यह डिजिटल हाजिरी का नियम सिर्फ शिक्षकों के लिए ही क्यों बनाया गया है, जबकि अन्य विभागों के सरकारी कर्मचारी और अधिकारी भी ड्यूटी पर हैं. शिक्षिका का साफ कहना है कि अगर पारदर्शिता और समय की पाबंदी इतनी ही जरूरी है, तो फिर मुख्यमंत्री से लेकर तमाम बड़े अधिकारियों और बाकी विभागों के कर्मचारियों की अटेंडेंस भी ऑनलाइन दर्ज होनी चाहिए. उनके इस दो टूक और तीखे तेवर वाले वीडियो ने एक बार फिर ऑनलाइन अटेंडेंस के इस पूरे मुद्दे को देश भर में चर्चा का केंद्र बना दिया है.

ऑनलाइन ऐप से हाजिरी पर खड़े किए गंभीर सवाल

वायरल वीडियो में नजर आ रही शिक्षिका निर्मला कोमल ने ड्यूटी के दौरान ही मोबाइल पर यह वीडियो रिकॉर्ड किया. उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार ने स्कूलों में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति दर्ज करने के लिए एक नया अटेंडेंस ऐप लॉन्च किया है, जिसके जरिए ‘अटेंडेंस इन’ और ‘अटेंडेंस आउट’ करना अनिवार्य कर दिया गया है. इसके चलते शिक्षकों पर समय पर स्कूल पहुंचने का भारी दबाव रहता है. शिक्षिका ने ऐप के जरिए लगातार हो रही इस डिजिटल मॉनिटरिंग पर कड़ा ऐतराज जताया और कहा कि शिक्षकों को सिर्फ एक ऐप के सहारे शक की नजर से देखना और मॉनिटर करना बिल्कुल गलत है.

सिर्फ शिक्षकों के लिए लागू नियमों की आलोचना

शिक्षिका ने वीडियो में सिर्फ ऐप का विरोध ही नहीं किया, बल्कि शिक्षकों के सामने आने वाली व्यावहारिक परेशानियों को भी खुलकर सामने रखा. उन्होंने कहा कि समय पर स्कूल पहुंचने के इस मानसिक दबाव और जल्दबाजी के कारण कई बार रास्ते में शिक्षकों के साथ सड़क हादसे तक हो जाते हैं. उन्होंने तीखा सवाल किया कि क्या सरकार शिक्षकों की सुरक्षा और उनकी इन समस्याओं के बारे में भी कभी गहराई से सोचती है? निर्मला कोमल ने दो टूक कहा कि अगर सरकार को कर्मचारियों की हाजिरी और उनके काम की निगरानी करने का इतना ही शौक है, तो यह नियम सिर्फ स्कूलों तक सीमित क्यों है? उन्होंने मांग की कि कलेक्टर और अन्य तमाम सरकारी विभागों के अधिकारियों की अटेंडेंस भी ऑनलाइन ही होनी चाहिए.

‘न डरूंगी, न झुकूंगी, व्यवस्था नहीं सुधरी तो जनता लेगी बदला’

इस वीडियो की सबसे खास बात शिक्षिका के तेवर थे, जो बेहद आक्रामक और निडर नजर आ रहे थे. उन्होंने वीडियो में साफ ऐलान किया कि वे अपनी बात कहने से बिल्कुल नहीं डरतीं. उन्होंने सरकार को चेतावनी भरे लहजे में यह भी याद दिलाया कि अगर सिस्टम में सुधार नहीं किया गया और शिक्षकों को यूं ही परेशान किया जाता रहा, तो जनता आने वाले चुनावों में इसका पूरा हिसाब लेगी. इसके साथ ही उन्होंने सड़क पर घूमते मवेशियों जैसी बुनियादी समस्याओं की ओर भी सरकार का ध्यान खींचते हुए व्यवस्था पर तंज कसा. इस वायरल वीडियो के सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की ऑनलाइन अटेंडेंस को लेकर बहस एक बार फिर पूरी तरह गरमा गई है.

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