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IAS Story: इंजीनियरिंग, MBA की डिग्री, फिर बने आईएएस ऑफिसर, अब आखिर क्यों हो गए सस्पेंड

UPSC पास कर IAS बनना लाखों युवाओं का सपना होता है, लेकिन जिम्मेदार पद पर हर कदम अहम होता है. इन दिनों त्रिपुरा कैडर के निलंबित IAS अभिषेक चंद्र ED की कार्रवाई के कारण सुर्खियों में हैं.

By: Munna Verma | Published: August 2, 2026 7:00:33 PM IST



IAS Story: देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC सिविल सेवा पास कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पहुंचना लाखों युवाओं का सपना होता है. लेकिन प्रशासनिक सेवा में आने के बाद अधिकारियों की पहचान केवल उनकी उपलब्धियों से ही नहीं, बल्कि उनके कार्यों और आचरण से भी बनती है. इन दिनों त्रिपुरा कैडर के निलंबित IAS अधिकारी अभिषेक चंद्र प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के चलते चर्चा में हैं.

ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान अभिषेक चंद्र समेत अन्य आरोपियों से जुड़ी लगभग 1.12 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच (कुर्क) किया है. यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई है.

इंजीनियरिंग और MBA के बाद बने IAS

अभिषेक चंद्र ने पुणे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (B.E.) की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB), हैदराबाद से MBA किया. तकनीकी और प्रबंधन शिक्षा के बाद उन्होंने सिविल सेवा का रास्ता चुना और IAS अधिकारी बने. हालांकि, वर्तमान में उनका नाम एक कथित वित्तीय अनियमितता और मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ने के कारण सुर्खियों में है.

ED ने किन संपत्तियों पर की कार्रवाई?

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, अटैच की गई संपत्तियों में अभिषेक चंद्र के बैंक खातों में मौजूद धनराशि, उत्पल कुमार चौधरी से जुड़ी कंपनियों के बैंक बैलेंस और एक निजी हाउसिंग कंपनी से संबंधित वित्तीय लेनदेन शामिल हैं. जांच एजेंसी का आरोप है कि यह धन कथित तौर पर अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) का हिस्सा है.

कैसे सामने आया पूरा मामला?

ED ने यह जांच पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा पुलिस द्वारा दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू की. आरोप है कि मुख्य आरोपी उत्पल कुमार चौधरी और उसके सहयोगियों ने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर निवेशकों और कारोबारियों को झांसा दिया. जांच में यह भी सामने आया कि सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों जैसे नामों वाली कंपनियां बनाकर सरकारी टेंडर और बड़े मुनाफे का लालच दिया गया. कथित तौर पर फर्जी पहचान पत्रों और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लोगों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई.

अभिषेक चंद्र पर क्या हैं आरोप?

ED का दावा है कि जांच के दौरान ऐसे वित्तीय लेनदेन मिले, जिनसे संकेत मिलता है कि कथित अपराध से जुड़े धन का कुछ हिस्सा अभिषेक चंद्र के व्यक्तिगत बैंक खाते में पहुंचा. इसके अलावा, जांच एजेंसी का कहना है कि इसी धन का उपयोग उनके नाम पर एक निजी हाउसिंग परियोजना में फ्लैट बुक कराने के लिए भी किया गया. इन आरोपों की जांच अभी जारी है और मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा.

पहले भी दर्ज हो चुका है मामला

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इससे पहले भी नागपुर की एक कंपनी ने अभिषेक चंद्र और अन्य लोगों के खिलाफ करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि फर्जी सरकारी टेंडर दस्तावेजों के जरिए कंपनी से लगभग 14.55 करोड़ रुपये की ठगी की गई.

जांच अभी जारी

ED के अनुसार, इस मामले में अब तक दो अस्थायी अटैचमेंट आदेशों के तहत लगभग 1.63 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं. एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी.

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