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Indian Army Story: दिन में बेचा कॉफी, रात को किया फूड डिलीवरी, सपने को ऐसे रखा जिंदा, अब बना सेना में अफसर

Indian Army Story: असम के जोरहाट के वेद विजय नियोग ने बरिस्ता और फूड डिलीवरी एजेंट के रूप में काम करते हुए अपने आर्मी ऑफिसर बनने के सपने को साकार किया.

By: Munna Verma | Published: May 31, 2026 2:39:04 PM IST



Indian Army Success Story: परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और हौसले बुलंद हों, तो सफलता एक दिन जरूर कदम चूमती है. असम के जोरहाट निवासी वेद विजय नियोग की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को जीवित रखते हैं. बचपन से ही उनका लक्ष्य भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना था. हालांकि, इस सफर में उन्हें कई उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी.

वेद विजय नियोग को शुरुआती दौर में इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) के लिए चुना गया था. यह उनके सपने की दिशा में एक बड़ा कदम था. लेकिन कुछ अप्रत्याशित परिस्थितियों ने उन्हें उस अवसर से पीछे हटने पर मजबूर कर दिया. कई लोगों के लिए यह एक बड़ी निराशा हो सकती थी, लेकिन वेद ने इसे अपनी मंजिल का अंत नहीं बनने दिया.

दिल्ली में संघर्ष के बीच जारी रहा सपना

बेहतर अवसरों की तलाश में वेद दिल्ली पहुंचे. यहां उन्होंने जीवनयापन के लिए कई तरह की नौकरियां कीं. दिन में वह एक बरिस्ता के रूप में कॉफी तैयार करते थे, जबकि रात में फूड डिलीवरी का काम करके अपनी जरूरतें पूरी करते थे. आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया.

इसी दौरान उन्होंने फोटोग्राफी के प्रति अपने जुनून को भी आगे बढ़ाया. देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राएं कीं और कई प्रतिष्ठित ब्रांड्स के साथ काम किया. लेकिन इन सभी उपलब्धियों के बावजूद उनके मन में सेना की वर्दी पहनने की इच्छा हमेशा जीवित रही.

CDS परीक्षा पास कर हासिल की नई मंजिल

अपने सपने को साकार करने के लिए वेद ने एक बार फिर प्रयास किया और कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज़ (CDS) परीक्षा की तैयारी शुरू की. कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने परीक्षा सफलतापूर्वक पास की और ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA), चेन्नई में प्रवेश प्राप्त किया.

आखिरकार पूरा हुआ सेना में अधिकारी बनने का सपना

वर्षों के संघर्ष, त्याग और अथक परिश्रम के बाद वेद विजय नियोग को भारतीय सेना में कमीशन मिला. यह केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं थी, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए एक संदेश था कि सच्चे समर्पण और निरंतर प्रयास से कोई भी सपना असंभव नहीं होता.

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