UPSC Success Story: कभी मेडिकल कॉलेज में दाखिले का सपना देखने वाली मानसी सोनावणे ने आखिरकार प्रशासनिक सेवा को अपना करियर बनाया. 12वीं के बाद NEET क्वालिफाई करने के बावजूद उन्होंने MBBS की राह छोड़कर UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया. दो बार असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और तीसरे प्रयास में UPSC CSE 2021 पास कर ऑल इंडिया रैंक 627 हासिल की.
उनकी कहानी उन अभ्यर्थियों के लिए खास मायने रखती है जो लगातार प्रयास के बावजूद सफलता हासिल नहीं कर पा रहे हैं.
NEET पास करने के बाद बदली करियर की दिशा
महाराष्ट्र के औरंगाबाद की रहने वाली मानसी ने 12वीं के बाद NEET परीक्षा क्वालिफाई की थी. इसके बाद उनके सामने मेडिकल की पढ़ाई कर डॉक्टर बनने का रास्ता खुला था. हालांकि, उन्होंने मेडिकल कॉलेज में जाने के बजाय BA की पढ़ाई करने और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का निर्णय लिया. इस फैसले के पीछे उनके पिता नरेंद्र सोनावणे की प्रेरणा भी महत्वपूर्ण रही. पेशे से अकाउंटेंट उनके पिता खुद IAS अधिकारी बनने की इच्छा रखते थे. परिवार से मिली इस प्रेरणा ने मानसी को UPSC को अपने करियर विकल्प के रूप में गंभीरता से लेने के लिए प्रेरित किया.
पहले दो प्रयासों में मिली असफलता
UPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी आसान नहीं होती. मानसी को भी अपने शुरुआती प्रयासों में निराशा का सामना करना पड़ा. पहले प्रयास ने उन्हें परीक्षा के पैटर्न और उसकी मांगों को समझने का अवसर दिया, लेकिन वह सफल नहीं हो सकीं. दूसरे प्रयास में भी परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहा. लगातार दो असफलताओं के बावजूद उन्होंने तैयारी छोड़ने के बजाय अपनी गलतियों का विश्लेषण किया. उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि उनकी रणनीति और तैयारी में किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है.
तीसरे प्रयास में मिली बड़ी सफलता
दो असफल प्रयासों के बाद मानसी ने अपनी तैयारी के तरीके में बदलाव किया. बेहतर रणनीति और आत्मविश्वास के साथ उन्होंने तीसरी बार UPSC CSE में हिस्सा लिया. इस बार उन्होंने परीक्षा के तीनों चरण प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और व्यक्तित्व परीक्षण सफलतापूर्वक पार किए. UPSC Civil Services Examination 2021 में उन्हें AIR 627 प्राप्त हुई और उनका चयन Indian Defence Accounts Service (IDAS) के लिए हुआ.
असफलता से सीखने की दी सलाह
मानसी का सफर यह दिखाता है कि करियर की शुरुआती योजना बदलना हमेशा असफलता का संकेत नहीं होता. NEET क्वालिफाई करने से लेकर UPSC के दो असफल प्रयासों और फिर तीसरे प्रयास में सफलता तक, उनका रास्ता कई बदलावों से गुजरा. UPSC अभ्यर्थियों के लिए उनका संदेश भी इसी अनुभव से जुड़ा है कि लगातार प्रयास करते रहना और खुद पर विश्वास बनाए रखना जरूरी है. उनका मानना है कि मुश्किल दौर में भी डटे रहना, आत्मविश्वास रखना और अपनी कमियों पर काम करना सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है.