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DM IAS Story: M.Sc की डिग्री, फिर PCS से बने IAS Officer, अब सोशल मीडिया पर आखिर क्यों हैं छाए

मथुरा में फीस की परेशानी के कारण पढ़ाई से दूर हुए चार बच्चे कांवड़ लेकर निकले। वायरल वीडियो के बाद DM CP Singh ने संज्ञान लिया और बच्चों की फीस, किताब, ड्रेस समेत मदद की व्यवस्था कराई।

By: Munna Verma | Last Updated: August 14, 2026 3:32:17 PM IST



DM IAS Story: सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने मथुरा के चार बच्चों की मुश्किलें सामने ला दीं. आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई रुकने के बाद ये बच्चे कांवड़ लेकर हरिद्वार से निकले थे. उनकी उम्मीद थी कि भगवान भोलेनाथ उनकी प्रार्थना सुनेंगे और उन्हें दोबारा स्कूल जाने का मौका मिलेगा. मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने बच्चों और उनके परिवार की स्थिति को गंभीरता से लिया.

वीडियो में बच्चों की परेशानी सामने आने के बाद मथुरा के जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह (CP Singh) ने मामले का संज्ञान लिया. चारों बच्चों को उनके दिव्यांग माता-पिता के साथ कार्यालय बुलाया गया और उनकी शिक्षा से जुड़ी समस्या को समझा गया. प्रशासन की पहल के बाद दो बच्चों की स्कूल फीस माफ कराई गई, जबकि तीसरे बच्चे की फीस पहले से ही माफ थी. वहीं चौथे बच्चे पर फीस लागू नहीं थी. बच्चों को पढ़ाई के लिए बैग, किताबें और ड्रेस भी उपलब्ध कराई गईं.

कौन हैं मथुरा DM चंद्र प्रकाश सिंह?

चंद्र प्रकाश सिंह वर्तमान में मथुरा के जिलाधिकारी हैं. उनका प्रशासनिक करियर PCS अधिकारी के तौर पर शुरू हुआ था और बाद में उन्हें IAS कैडर में प्रमोशन मिला. वह कासगंज और बुलंदशहर समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. मथुरा में भी वह शिक्षा, प्रशासन और जनसमस्याओं से जुड़े मामलों को लेकर सक्रिय नजर आए हैं. अप्रैल 2026 में भी उन्होंने स्कूल प्रबंधकों को निर्देश दिया था कि अभिभावकों पर मनमानी फीस का बोझ न डाला जाए और RTE के तहत पात्र बच्चों का दाखिला सुनिश्चित किया जाए.

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SDM ने चारों बच्चों को लिया गोद

बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए संबंधित SDM ने चारों बच्चों को गोद लेने की पहल की है. इसके साथ ही उनके दिव्यांग माता-पिता को दिव्यांग पेंशन का लाभ दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी. इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा कि आर्थिक परेशानियों के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए. प्रशासन की मदद से इन बच्चों के लिए स्कूल लौटने की राह आसान होती दिख रही है.

बच्चों की कांवड़ यात्रा बनी उम्मीद की कहानी

चार बच्चों की यह कहानी सिर्फ एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रही. पढ़ाई छूटने की चिंता लेकर निकले बच्चों को अब प्रशासनिक मदद मिली है. किताबों और ड्रेस से लेकर फीस और सरकारी सहायता तक, कई स्तरों पर उनकी मदद की जा रही है. इन बच्चों के लिए सबसे बड़ी राहत यही है कि आर्थिक मुश्किलों के बीच उनकी पढ़ाई दोबारा शुरू होने की उम्मीद जगी है.

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