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ISRO Success Story: बढ़ई की बेटी ने रचा इतिहास, 12 हजार छात्रों को पीछे छोड़ Mission ShakthiSAT में बनाई जगह

ISRO Success Story: आंध्र प्रदेश की 14 वर्षीय कंडुला जेसी ने 12 हजार उम्मीदवारों में जगह बनाकर Mission ShakthiSAT के लिए चयन हासिल किया.

By: Munna Verma | Published: July 27, 2026 3:13:19 PM IST



ISRO Success Story: आंध्र प्रदेश के डोवलेश्वरम की रहने वाली कंडुला जेसी ने अपनी मेहनत और जुनून से यह साबित कर दिया है कि सपनों को पूरा करने के लिए संसाधन नहीं, बल्कि लगन और सही मार्गदर्शन जरूरी होता है. 14 वर्षीय जेसी, जो एक बढ़ई की बेटी हैं, अब Mission ShakthiSAT के लिए चुनी गई 20 भारतीय छात्राओं में शामिल हो गई हैं.

यह मिशन दुनिया के पहले ग्लोबल ऑल-गर्ल्स लूनर क्यूबसैट प्रोजेक्ट के रूप में चर्चा में है. खास बात यह है कि जेसी आंध्र प्रदेश की अकेली छात्रा हैं, जिन्होंने लगभग 12 हजार रजिस्ट्रेशन में से भारतीय फाइनल लिस्ट में जगह बनाई है.

टीचर ने पहचानी प्रतिभा और दिखाया आगे बढ़ने का रास्ता

जेसी डोवलेश्वरम के जिला परिषद गर्ल्स हाई स्कूल (ZPGHS) में पढ़ती हैं. उनकी साइंस टीचर मणिमाला ने स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब में जेसी की विज्ञान और इनोवेशन के प्रति रुचि को पहचाना. मणिमाला ने ही पिछले साल जेसी का Mission ShakthiSAT के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था. जेसी ने न केवल खुद इस अवसर का लाभ उठाया, बल्कि अपने स्कूल की अन्य आठ छात्राओं को भी आवेदन करने के लिए प्रेरित किया. शुरुआत में ऑनलाइन कोर्स शुरू हो चुका था, लेकिन टीचर के प्रयासों से जेसी को आगे बढ़ने का मौका मिला.

एडवांस स्पेस टेक्नोलॉजी सीखकर हासिल किया मुकाम

Mission ShakthiSAT का चयन आसान नहीं था. इसमें सैटेलाइट सिस्टम, प्रोपल्शन, थर्मोडायनामिक्स और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे विषयों पर आधारित कई ऑनलाइन मॉड्यूल और सैकड़ों प्रशिक्षण सत्र शामिल थे. जेसी ने 10वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ रोजाना ऑनलाइन क्लास में हिस्सा लिया. शुरुआत में कई विषय मुश्किल लगे, लेकिन लगातार मेहनत और सीखने की इच्छा ने उन्हें आगे बढ़ाया. इसके बाद इंटरनेशनल एक्सपर्ट्स के साथ इंटरव्यू और वीडियो प्रेजेंटेशन जैसे चरणों को पार कर उन्होंने अपनी जगह बनाई.

आर्थिक मुश्किलों के बावजूद नहीं टूटा सपना

जेसी के पिता बढ़ई का काम करते हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण उन्हें प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में पढ़ाई करनी पड़ी. हालांकि यही स्कूल और वहां की इनोवेशन लैब उनके लिए नए अवसर लेकर आई. जेसी की मां अरुणा ने बताया कि बेटी को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के सामने आत्मविश्वास के साथ बात करते देखना परिवार के लिए गर्व का पल था.

अब चांद से जुड़े मिशन की ट्रेनिंग लेंगी जेसी

23 अगस्त से जेसी Mission ShakthiSAT के अगले चरण में शामिल होंगी. इसके तहत वह नई दिल्ली में वैज्ञानिकों के साथ सैटेलाइट डिजाइन, पेलोड डेवलपमेंट और मिशन ऑपरेशन की ट्रेनिंग लेंगी. छात्राओं द्वारा तैयार किया जाने वाला लूनर क्यूबसैट भविष्य में चंद्रमा की कक्षा से जुड़ी गतिविधियों के लिए काम करेगा.

जेसी का सपना: ISRO में बनाना करियर

जेसी का लक्ष्य भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से जुड़ना है. उनका मानना है कि मेहनत और सीखने की इच्छा के दम पर कोई भी छात्र अपने सपनों को हासिल कर सकता है. कंडुला जेसी की कहानी उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद विज्ञान और तकनीक की दुनिया में बड़ा मुकाम हासिल करना चाहते हैं.

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