IAS Story: बिहार सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए छह आईएएस अधिकारियों के तबादले किए हैं. इस बदलाव में आईएएस अधिकारी दिव्या शक्ति का नाम भी खास चर्चा में है. सरकार ने उन्हें मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग में उत्पाद आयुक्त (Excise Commissioner) की जिम्मेदारी सौंपी है.
नई जिम्मेदारी के साथ बिहार में शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू कराने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर होगी. इससे पहले दिव्या शक्ति कैमूर में उप विकास आयुक्त (DDC) के पद पर कार्यरत थीं. प्रशासनिक अनुभव के साथ अब उन्हें एक ऐसे विभाग की कमान मिली है, जो बिहार सरकार की प्रमुख नीतियों में से एक शराबबंदी के क्रियान्वयन से सीधे जुड़ा है.
छपरा से BITS Pilani तक का सफर
दिव्या शक्ति मूल रूप से बिहार के छपरा जिले की रहने वाली हैं. पढ़ाई में शानदार प्रदर्शन करने वाली दिव्या ने देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में शामिल BITS Pilani से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने अमेरिका की एक कंपनी में करीब दो साल तक नौकरी की. अच्छी कॉरपोरेट नौकरी के बावजूद उनके मन में सिविल सेवा में जाने का सपना था. इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़कर UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की.
पहली कोशिश में बनीं IPS, लेकिन लक्ष्य था IAS
दिव्या शक्ति की UPSC यात्रा भी युवाओं के लिए प्रेरणा देने वाली है. उन्होंने वर्ष 2018 में अपने पहले प्रयास में UPSC परीक्षा पास की और 79वीं रैंक हासिल की. इस सफलता के साथ उन्हें IPS सेवा मिली. हालांकि, उनका अंतिम लक्ष्य IAS अधिकारी बनना था. पहली सफलता के बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखने का फैसला किया. यह निर्णय आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को लेकर समझौता नहीं किया.
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वर्ष 2021 में 58वीं रैंक के साथ पूरा हुआ IAS बनने का सपना
लगातार मेहनत के बाद दिव्या शक्ति ने 2021 में UPSC परीक्षा में 58वीं रैंक हासिल की. इस बार उन्होंने IAS सेवा में जगह बनाई और सबसे खास बात यह रही कि उन्हें बिहार कैडर मिला. एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट से लेकर अमेरिका में नौकरी और फिर दो बार UPSC परीक्षा में सफलता तक का उनका सफर बताता है कि लक्ष्य स्पष्ट हो तो रास्ते में आने वाली चुनौतियों को पार किया जा सकता है.
अब नई जिम्मेदारी के साथ दिव्या शक्ति के सामने बिहार में शराबबंदी को प्रभावी तरीके से लागू कराने और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की बड़ी चुनौती है. उनकी नई भूमिका पर प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ आम लोगों की भी नजर रहेगी.