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IAS Story: IIT Delhi से इंजीनियरिंग, IIM से MBA, लंदन की नौकरी छोड़ बनीं IAS, अब चर्चा में क्यों हैं अचानक

IAS Divya Mittal Story: वर्ष 2013 बैच की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने 13 साल की सेवा के बाद इस्तीफे का ऐलान किया है. IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर की पढ़ाई से लेकर देवरिया-मिर्जापुर में जनसेवा तक, जानिए उनका कैसा रहा प्रेरक सफर.

By: Munna Verma | Published: August 30, 2026 1:09:19 PM IST



IAS Divya Mittal Resignation: 2013 बैच की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने करीब 13 वर्षों की प्रशासनिक सेवा के बाद अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक और बेहद निजी पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी. अपने संदेश में उन्होंने सरकारी पद से विदाई को एक सफर का अंत जरूर बताया, लेकिन देश के लिए कुछ करने का सपना हमेशा अपने भीतर जिंदा रहने की बात कही.

दिव्या मित्तल का यह पोस्ट सिर्फ इस्तीफे की सूचना नहीं था, बल्कि उनके जीवन और जनसेवा के अनुभवों का एक भावुक दस्तावेज भी रहा.

IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ाई, फिर लंदन में नौकरी

दिव्या मित्तल एक साधारण परिवेश से आती हैं. उन्होंने IIT दिल्ली से पढ़ाई करने के बाद IIM बैंगलोर से उच्च शिक्षा हासिल की. इसके बाद उन्होंने लंदन में नौकरी की और करियर में वह मुकाम हासिल किया जिसका सपना बहुत से युवा देखते हैं. लेकिन विदेश में सफलता मिलने के बावजूद उनके मन में एक खालीपन बना रहा. उन्हें लगा कि अपने देश से दूर रहना उनके लिए सहज नहीं था. भारत की शिक्षा, आत्मविश्वास और अवसरों को अपना ऋण मानते हुए उन्होंने देश लौटने और इस कर्ज को चुकाने का फैसला किया.

देवरिया और मिर्जापुर ने सिखाया जनसेवा का असली अर्थ

IAS बनने के बाद उनकी विभिन्न जिम्मेदारियों ने उन्हें प्रशासन और आम लोगों के बीच की वास्तविक दूरी को समझने का अवसर दिया. देवरिया में उन्होंने सीखा कि सही के पक्ष में खड़ा होना केवल विकल्प नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है. वहीं मिर्जापुर ने उन्हें यह विश्वास दिया कि असंभव कोई अंतिम सच नहीं होता. लोगों का भरोसा और स्थानीय आस्था उनके प्रशासनिक अनुभवों का अहम हिस्सा रहे.

75 साल बाद गांव के घरों तक पहुंचा पानी

दिव्या मित्तल ने अपने कार्यकाल की एक घटना को खास तौर पर याद किया. मिर्जापुर के लहुरिया देह गांव में एक बुजुर्ग महिला ने पहली बार घर तक पानी पहुंचने पर उन्हें आशीर्वाद दिया था. बताया गया कि एक जल परियोजना के जरिए 75 वर्षों के इंतजार के बाद 125 घरों तक पाइपलाइन से नल का पानी पहुंचा. दिव्या के लिए यह सरकारी योजना से कहीं अधिक मानवीय उपलब्धि थी.

ग्रामीण बच्चों के लिए बनाया मुफ्त मोबाइल ऐप

जनसेवा के साथ तकनीक के इस्तेमाल पर भी उन्होंने जोर दिया. ग्रामीण उत्तर प्रदेश में पहली पीढ़ी के शिक्षार्थियों की मदद के लिए उन्होंने एक फ्री मोबाइल ऐप तैयार किया. इसके पीछे उन्हें अपने फ्रेंच सीखने के अनुभव से प्रेरणा मिली, जहां बातचीत आधारित शिक्षा ने उन्हें काफी मदद की थी.

‘सरकारी फाइल के पीछे एक इंसान होता है’

दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट में जनसेवा से मिली सीख को बेहद सरल शब्दों में रखा. उनका मानना है कि सरकारी प्रक्रिया और हर फाइल के पीछे एक वास्तविक व्यक्ति और उसका जीवन जुड़ा होता है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शुरुआत में उन्हें लगता था कि वह लोगों को कुछ देने के लिए प्रशासन में आई हैं. लेकिन वर्षों बाद उन्हें महसूस हुआ कि लोगों के प्यार, विश्वास और दुआओं से उन्हें कहीं अधिक मिला.

मई में देवरिया से लखनऊ के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर स्थानांतरित हुईं दिव्या मित्तल मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली हैं. उनके पति गगनदीप सिंह भी पूर्व नौकरशाह रह चुके हैं. दोनों ने IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से शिक्षा हासिल की है.     

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