Guest Lecturer Fake PhD Case: कर्नाटक के सरकारी डिग्री कॉलेजों से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां 249 गेस्ट लेक्चरर्स पर नौकरी हासिल करने के लिए कथित तौर पर नकली PhD सर्टिफिकेट जमा करने का आरोप लगा है. मामले की जानकारी मिलने के बाद कॉलेज और टेक्निकल एजुकेशन विभाग ने सख्त कदम उठाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
कॉलेज शिक्षा आयुक्त ने 21 जुलाई को आदेश जारी करते हुए सभी संबंधित कॉलेजों के प्रिंसिपलों को निर्देश दिया है कि ऐसे उम्मीदवारों के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए और तय समय के भीतर अनुपालन रिपोर्ट जमा की जाए.
फर्जी PhD सर्टिफिकेट मामले में होगी FIR
सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कॉलेज प्रिंसिपलों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की. इसमें फर्जी दस्तावेज जमा करने वाले गेस्ट लेक्चरर्स के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया पर चर्चा की गई. विभाग ने फैसला किया है कि इन सभी 249 गेस्ट लेक्चरर्स को नौकरी से हटाया जाएगा. इसके अलावा भविष्य की सरकारी चयन प्रक्रियाओं में भी इन्हें प्रतिबंधित या ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है.
विश्वविद्यालयों की जांच में सामने आया मामला
गेस्ट लेक्चरर चयन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों के दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच नियुक्ति अधिकारी द्वारा की जाती है. नियुक्ति आदेश जारी होने के बाद प्रमाण पत्रों की वास्तविकता जांचने के लिए उन्हें संबंधित विश्वविद्यालयों के पास भेजा जाता है. जांच के दौरान विश्वविद्यालयों ने पुष्टि की कि सत्यापन के लिए भेजे गए 249 PhD प्रमाण पत्र वास्तविक नहीं पाए गए. इसके बाद कॉलेज शिक्षा विभाग ने संबंधित उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया.
कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र से सबसे ज्यादा मामले
इस पूरे मामले में कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र से बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाण पत्र सामने आए हैं. कुल 249 मामलों में से 148 उम्मीदवार इसी क्षेत्र के जिलों से जुड़े हैं.
जिलेवार आंकड़ों के अनुसार
कलबुर्गी में 33 उम्मीदवारों के प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए.
यादगीर में 31 मामले सामने आए.
बीदर में 28 उम्मीदवार शामिल हैं.
रायचूर में 24 मामले दर्ज किए गए.
कोप्पल में 13, विजयनगर में 9 और बल्लारी में 2 मामले सामने आए.
कुछ प्रमुख कॉलेजों में भी बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाण पत्र जमा किए जाने की बात सामने आई है.
पहली बार इतने बड़े स्तर पर मामला सामने आया
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2016 से पहले सरकारी डिग्री कॉलेजों में गेस्ट लेक्चरर नियुक्ति के लिए PhD अनिवार्य योग्यता नहीं थी. ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों द्वारा फर्जी PhD प्रमाण पत्र जमा करने का मामला कर्नाटक में पहली बार सामने आया है.
कुछ प्रमाण पत्रों की दोबारा जांच के निर्देश
वहीं, कुछ कॉलेजों के प्रिंसिपलों ने बताया है कि 8 उम्मीदवारों के प्रमाण पत्र जांच में सही पाए गए हैं. इन मामलों में संबंधित अधिकारियों को प्रमाण पत्रों की दोबारा पुष्टि करने के निर्देश दिए गए हैं.
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता पर जोर
कर्नाटक सरकार का यह कदम सरकारी नियुक्तियों में दस्तावेज सत्यापन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए नौकरी हासिल करने वाले उम्मीदवारों पर कार्रवाई से भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने की उम्मीद है.
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