CISF Success Story: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के बेल्थरा रोड नगर पंचायत के वार्ड नंबर-6 निवासी जीतू कुमार ने यह साबित कर दिया कि यदि इरादे मजबूत हों तो आर्थिक परेशानियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं. सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच उन्होंने कड़ी मेहनत की और SSC GD परीक्षा पास कर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में अपनी जगह बनाई.
छह महीने का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद जब जीतू पहली बार अपने गृह नगर लौटे तो स्थानीय लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. रेलवे स्टेशन पर फूल-मालाओं के साथ उनका अभिनंदन किया गया, जिसने पूरे क्षेत्र के युवाओं में नया उत्साह भर दिया.
आर्थिक संकट के बीच नहीं छोड़ा पढ़ाई का सपना
जीतू कुमार स्वर्गीय मिंटू कनौजिया के पुत्र हैं. उनके पिता कपड़ों पर प्रेस करने का काम करके परिवार का पालन-पोषण करते थे. परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी और जीवन की आवश्यक जरूरतों को पूरा करना भी चुनौतीपूर्ण था. पिता के निधन के बाद जिम्मेदारियां और बढ़ गईं. ऐसे समय में जीतू ने हार मानने के बजाय परिवार का सहारा बनने का फैसला किया और अपनी पढ़ाई भी जारी रखी.
शाम को अंडे का ठेला, रात में सरकारी नौकरी की तैयारी
अपनी शिक्षा का खर्च और परिवार की मदद करने के लिए जीतू कुमार बेल्थरा रोड बस स्टेशन पर शाम के समय अंडे का ठेला लगाते थे. दिनभर की मेहनत के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया. रात में घंटों पढ़ाई कर वे सरकारी नौकरी की तैयारी करते रहे. उनकी यही लगन और अनुशासन आखिरकार रंग लाया. लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने SSC GD परीक्षा में सफलता हासिल की और CISF में चयनित हो गए.
गृह नगर पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद जब जीतू कुमार पहली बार बेल्थरा रोड रेलवे स्टेशन पहुंचे तो स्थानीय लोगों, मित्रों और शुभचिंतकों ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया. इस अवसर पर मुन्ना यादव, बबलू कनौजिया, अनिल कनौजिया, अमन, बृजेश, नौशाद अहमद, छोटू सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे. सभी ने जीतू को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उनकी सफलता को पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बताया.
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी जीतू की सफलता
जीतू कुमार की सफलता यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास बना रहे तो मंजिल जरूर मिलती है. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया और आज उनकी कहानी हजारों युवाओं को संघर्ष के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है.
उनकी उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए उम्मीद की मिसाल है जो आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद सरकारी नौकरी पाने का सपना देख रहे हैं.
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