Bihar BPSC Job Fraud: बिहार में सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) दिलाने के नाम पर कथित रिश्वत और धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है. पटना जिला बल में तैनात एक महिला सब-इंस्पेक्टर उनके बेटे और एक डॉक्टर परिवार पर बीपीएससी परीक्षा में नौकरी दिलाने के बदले लाखों रुपये के लेनदेन का आरोप लगा है. मामला अब पुलिस से निकलकर इकोनॉमिक ऑफेंस यूनिट (ईओयू) तक पहुंच चुका है, जिसने पूरे प्रकरण की गहन जांच शुरू कर दी है. बीपीएससी के जरिए ही SDM, DSP, रेवेन्यू ऑफिसर और अन्य विभागों में अधिकारी बनते हैं.
ईओयू ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत पटना जिला बल की सब-इंस्पेक्टर आशा सिंह, उनके बेटे रितेश कुमार, डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार, उनकी पत्नी डॉ. रजनी और उनके पिता ब्रजकिशोर प्रसाद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार राजनीतिक रूप से भी सक्रिय रहे हैं. वह कुम्हरार विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं और वर्तमान में जदयू के प्रदेश महासचिव बताए जा रहे हैं.
बीपीएससी नौकरी दिलाने के लिए 40 लाख रुपये लेने का आरोप
आरोप है कि रितेश कुमार को बीपीएससी परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार कुमार ने 40 लाख रुपये लिए थे. परिवार को भरोसा दिलाया गया था कि नौकरी पक्की करवा दी जाएगी. लेकिन जब अंतिम मेरिट सूची में रितेश का नाम नहीं आया, तब पूरे मामले पर विवाद शुरू हो गया. परिवार का कहना है कि नौकरी नहीं मिलने के बाद रकम वापस मांगने पर टालमटोल शुरू हो गई, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया.
25 लाख का चेक हुआ बाउंस
शिकायत के अनुसार आरोपियों की ओर से 25 लाख रुपये का चेक दिया गया था, लेकिन बैंक में सिग्नेचर मेल नहीं खाने की वजह से वह बाउंस हो गया. वहीं बाकी 15 लाख रुपये लौटाने का आश्वासन भी पूरा नहीं किया गया. इसके बाद पीड़ित पक्ष ने धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी.
जक्कनपुर थाने में दर्ज हुई एफआईआर
रितेश कुमार ने 21 जनवरी 2024 को पटना के जक्कनपुर थाने में डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार और उनके पिता के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई थी. पुलिस जांच के बाद जुलाई 2024 में आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किया गया.
पारिवारिक पहचान से हुआ था संपर्क
रितेश कुमार ने पुलिस को बताया कि उनके परिवार और ब्रजकिशोर प्रसाद के बीच पुराना पारिवारिक संबंध था. इसी जान-पहचान के चलते नौकरी को लेकर बातचीत शुरू हुई थी. आशा सिंह का डॉक्टर परिवार के घर आना-जाना भी था, जिससे भरोसे का माहौल बना.
हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद जांच तेज
मामले ने नया मोड़ तब लिया जब डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार ने पटना हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल उठाया कि आखिर 40 लाख रुपये का लेनदेन कैसे हुआ और इसकी गंभीर जांच अब तक क्यों नहीं की गई. इसके बाद ईओयू ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी.
महिला दारोगा ने बताई पैसों की व्यवस्था
जांच के दौरान आशा सिंह ने बताया कि उन्होंने बेटे के भविष्य के लिए बैंक से लोन लिया था. उन्होंने अपनी बचत, डेयरी लोन और पर्सनल लोन मिलाकर करीब 22 लाख रुपये जुटाए थे. बाकी रकम अन्य स्रोतों से दी गई थी. अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.