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Success Story: मुंबई यूनिवर्सिटी से B.com, पहले साल में छोड़ी पढ़ाई, ऐसे बदली सोच, फिर खड़ी की करोड़ों का कारोबार

Success Story: D-Mart की सादगी, किफायती कीमतें और ग्राहकों की जरूरतों पर पकड़ ने इसे भारत की बड़ी रिटेल चेन बनाया है. इसके पीछे राधाकिशन दमानी की दूरदर्शी सोच है.

By: Munna Verma | Published: August 10, 2026 11:42:52 AM IST



Success Story: भारत के रिटेल सेक्टर में D-Mart आज एक ऐसा नाम है जिसे किसी परिचय की जरूरत नहीं है. सादे स्टोर, कम कीमतें और ग्राहकों की रोजमर्रा की जरूरतों पर फोकस, यही वह मॉडल है जिसने D-Mart को देश की प्रमुख रिटेल चेन में शामिल किया है. इसके पीछे हैं राधाकिशन दमानी, जिन्होंने बिना शोर-शराबे के कारोबार खड़ा किया और अपनी अलग पहचान बनाई.

राधाकिशन दमानी का जन्म 1954 में एक मारवाड़ी परिवार में हुआ था. उनका परिवार मुंबई में सीमित साधनों के साथ रहता था. उनके पिता शेयर बाजार से जुड़े थे, लेकिन दमानी ने शुरुआत में ट्रेडिंग को अपना करियर नहीं बनाया. उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी में कॉमर्स की पढ़ाई शुरू की, लेकिन पहले वर्ष के बाद कॉलेज छोड़ दिया. इसके बाद उन्होंने बॉल-बेयरिंग का कारोबार शुरू किया. यह काम कई वर्षों तक चलता रहा, लेकिन पिता के निधन के बाद परिस्थितियां बदल गईं और उन्हें परिवार के शेयर-ब्रोकिंग कारोबार में शामिल होना पड़ा.

शेयर बाजार ने बदली सोच

दलाल स्ट्रीट पर काम करते हुए दमानी ने बाजार को करीब से समझा. उन्होंने ट्रेडिंग और शॉर्ट-सेलिंग से शुरुआत की और धीरे-धीरे यह समझ विकसित की कि शेयर की कीमत और कंपनी की वास्तविक वैल्यू हमेशा एक जैसी नहीं होती. 1990 के दशक में शेयर बाजार की तेजी और हर्षद मेहता प्रकरण के दौरान उनके निवेश कौशल की परीक्षा हुई. उतार-चढ़ाव से मिले अनुभव ने बाद में उन्हें लंबी अवधि के निवेश की तरफ मोड़ दिया. HDFC Bank, 3M India और CRISIL जैसे कारोबारों में उनकी दिलचस्पी उनके धैर्यपूर्ण निवेश नजरिए को दर्शाती है.

D-Mart की नींव कैसे पड़ी?

दमानी का रिटेल से पहला बड़ा प्रयोग 1999 में हुआ, जब उन्होंने ‘अपना बाजार’ की फ्रेंचाइजी ली. अनुभव उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, लेकिन इससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि रिटेल कारोबार को किस तरह चलाना चाहिए. इसके बाद 2002 में मुंबई के पवई में पहला D-Mart स्टोर शुरू हुआ. दमानी ने तेज विस्तार के बजाय धीरे-धीरे मजबूत आधार बनाने को प्राथमिकता दी.

उनकी रणनीति सीधी थी कम कीमत, तेज इन्वेंट्री टर्नओवर और सप्लायर्स के साथ बेहतर संबंध. उन्होंने कई जगह जमीन खरीदने को प्राथमिकता दी, जिससे लंबे समय में किराये की लागत और विस्तार संबंधी जोखिम कम किए जा सकें.

2017 में IPO ने बदली तस्वीर

Avenue Supermarts का IPO 2017 में आया और निवेशकों की जबरदस्त दिलचस्पी देखने को मिली. D-Mart का बिजनेस मॉडल अब देशभर के निवेशकों के सामने था. कंपनी ने विस्तार के साथ-साथ लागत नियंत्रण और मुनाफे पर भी जोर बनाए रखा. राधाकिशन दमानी की खासियत सिर्फ कारोबार खड़ा करना नहीं, बल्कि पूंजी को धैर्य के साथ इस्तेमाल करना रही है. उनके निवेशों में भी ऐसे व्यवसायों पर जोर दिखाई देता है जिनमें मजबूत कैश फ्लो, भरोसेमंद मांग और लंबे समय तक टिकने की क्षमता हो.

सादगी में छिपी बड़ी सफलता

दमानी सार्वजनिक जीवन से काफी दूर रहना पसंद करते हैं. सादा पहनावा, सीमित सार्वजनिक मौजूदगी और कम इंटरव्यू उनकी पहचान का हिस्सा हैं. उनकी कार्यशैली भी इसी सोच को दर्शाती है कम दिखावा और ज्यादा फोकस. राधाकिशन दमानी की कहानी इस बात का उदाहरण है कि बड़ी सफलता हमेशा तेज फैसलों या आक्रामक विस्तार से नहीं मिलती. कई बार धैर्य, अनुशासन, सही वैल्यूएशन और लंबे समय तक लगातार काम करने की क्षमता ही सबसे बड़ा कारोबारी हथियार बन जाती है.

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