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EMI भरने वालों के लिए खुशखबरी! रेपो रेट को लेकर RBI ले सकती है बड़ा फैसला; ईरान जंग से है कनेक्शन

RBI Repo Rate Update: SBI की एक रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई अगले तीन तिमाहियों में 5 प्रतिशत से ऊपर बनी रह सकती है.

By: Shubahm Srivastava | Published: May 31, 2026 10:00:13 PM IST



RBI Monetary Policy June 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आगामी मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक पर बाजार, उद्योग जगत और निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव, बढ़ती ऊर्जा कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन चुनौतियों के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा. MPC की बैठक 3 से 5 जून तक चलेगी, जबकि RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 जून को नीतिगत फैसलों की घोषणा करेंगे.

रेपो रेट 5.25% पर रह सकती है स्थिर

अर्थशास्त्रियों और वित्तीय संस्थानों का मानना है कि RBI इस बार रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रख सकता है. मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए केंद्रीय बैंक ‘वेट एंड वॉच’ रणनीति जारी रख सकता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि ब्याज दरों में बदलाव करने के बजाय RBI फिलहाल महंगाई और वैश्विक आर्थिक हालात पर करीबी नजर बनाए रखना चाहेगा, ताकि भविष्य के फैसले अधिक संतुलित तरीके से लिए जा सकें.

महंगाई अनुमान में हो सकता है इजाफा

ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी, रुपये की कमजोरी और सप्लाई चेन में व्यवधान के कारण महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं. कई विशेषज्ञों का मानना है कि RBI अपने मौजूदा मुद्रास्फीति अनुमान को ऊपर की ओर संशोधित कर सकता है.

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई अगले तीन तिमाहियों में 5 प्रतिशत से ऊपर बनी रह सकती है. हालांकि चालू तिमाही में इसके 4 से 4.1 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है.

GDP ग्रोथ अनुमान में कटौती संभव

महंगाई दबाव और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए GDP वृद्धि दर के अनुमान में भी कुछ कमी की संभावना जताई जा रही है. बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का मानना है कि RBI वित्त वर्ष के लिए अपने विकास अनुमान को 6.9 प्रतिशत से घटाकर करीब 6.5 प्रतिशत कर सकता है.

हालांकि SBI की रिपोर्ट वित्त वर्ष के दौरान अपेक्षाकृत मजबूत आर्थिक गतिविधियों की ओर इशारा करती है और पूरे वर्ष के लिए 7.5 प्रतिशत GDP वृद्धि का अनुमान जताती है. ऐसे में अंतिम संशोधन RBI के जोखिम आकलन पर निर्भर करेगा.

सतर्क रुख बरकरार रखने के संकेत

RBI पहले ही संकेत दे चुका है कि वह आर्थिक वृद्धि और महंगाई के पूर्वानुमानों की समीक्षा कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल तटस्थ और सतर्क रुख बनाए रखेगा.

क्रिसिल की प्रधान अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे के अनुसार, वर्तमान महंगाई दबाव मुख्य रूप से आपूर्ति पक्ष से जुड़ा हुआ है, जिसमें ऊंची ईंधन लागत, कच्चे माल की बढ़ी कीमतें और कमजोर रुपया प्रमुख कारण हैं. ऐसे में जून की नीति बैठक में दरों और नीति रुख दोनों में यथास्थिति बनाए रखने की संभावना सबसे अधिक दिखाई दे रही है.

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