New labour laws: भारत में कर्मचारियों के काम करने के तरीके अक्सर कंपनियों के हाथ में होते हैं. कई जगहों पर ऐसा देखा जाता है कि कर्मचारियों के अधिकारों को नहीं माना जाता है बल्कि, कुछ प्राइवेट कंपनियों द्वारा उन्हें सैलरी समय से न देकर या फिर ओवरटाइम का पैसा नहीं देकर परेशान किया जाता है. हालांकि, इसके लिए श्रम कानून बने हुए हैं. कुछ कंपनियों में तो लीव्स, ग्रैच्युटी और ओवरटाइम को लेकर नियम और अधिकार भी नहीं हैं. इसे देखते हुए मजदूर दिवस पर सरकार ने कर्मचारियों के लिए कुछ नए नियम और अधिकार निकाले हैं.
इससे कर्मचारियों की वर्कलाइफ बैलेंस होने के साथ ही साथ नए रोजगार मॉडल को भी बढ़ावा मिल सकेगा. मिली जानकारी के मुताबिक पुराने कई कानूनों को मिलाकर अब नए कोड्स लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
लीव्स एनकैशमेंट, ग्रैच्युटी और ओवरटाइम के नियम
नए लेबर कोड के तहत अब तक देश के अधिकांश हिस्सों में नियम था कि कर्मचारी अगर नौकरी छोड़ रहा है तो वह अपनी लीव्स को एनकैश करा सकता है. लेकिन, अब नए लेबर कोड के तहत कर्मचारी अपनी लीव्स को कभी भी एनकैश करा सकता है. लीव्स एनकैश कराने का मतलब है कि आप अपनी बची हुई छुट्टियों के बदले पैसे ले सकते हैं. इसके अलावा आपके तय समय से ज्यादा काम करने पर अब आपको दोगुनी ओवरटाइम देनी चाहिए.
ग्रैच्युटी को लेकर भी बदला नियम
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पहले कर्मचारी 5 साल की नौकरी पूरी करने के बाद ही कंपनी द्वारा ग्रैच्युटी ले सकता था. 5 साल पूरे होने के बाद आपको आपकी कुछ महीनों की सैलरी ग्रैच्युटी के रूप में दी जाती थी. लेकिन, अब नए लेबर नियम के तहत अगर कर्मचारी किसी भी कंपनी में केवल एक साल तक ही काम करता है तो भी वह ग्रैच्युटी पाने का पूरा हकदार रहेगा. कंपनी द्वारा उसे ग्रैच्युटी दी जानी चाहिए.